बस्तर दशहरा की भीतर रैनी रस्म में बड़ा हादसा! रथ के नीचे दबने से ग्रामीण की दर्दनाक मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
21 अक्टूबर 2026 जगदलपुर :- 600 साल पुरानी परंपरा के बीच मातम; रथ खींचने की व्यवस्था, सुरक्षा नियमों के पालन और प्रशासनिक निगरानी को लेकर उठने लगी चर्चा
बस्तर के विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक दशहरा पर्व के दौरान एक दुखद हादसे की खबर सामने आई है। जगदलपुर में भीतर रैनी रस्म के दौरान रथ के नीचे दबने से एक ग्रामीण की मौके पर ही मौत होने की सूचना है। इस घटना से दशहरा पर्व के माहौल में शोक छा गया है। समाचार लिखे जाने तक मृतक की पहचान की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।

बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, आस्था और जनजातीय परंपराओं का प्रतीक है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा में हजारों ग्रामीण उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं। लेकिन इस बार पर्व के दौरान सामने आए विवादों और अब रथ के नीचे दबने से ग्रामीण की मौत की खबर ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रथ खींचने की व्यवस्था पर उठे सवाल
भीतर रैनी रस्म के दौरान रथ खींचना बस्तर दशहरा की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। इस रस्म में बड़ी संख्या में ग्रामीण हिस्सा लेते हैं। ऐसे में रथ खींचने के दौरान सुरक्षा, अनुशासन और निर्धारित नियमों का पालन बेहद जरूरी हो जाता है।

बताया जा रहा है कि हादसे में जान गंवाने वाला ग्रामीण रथ खींचने की प्रक्रिया में शामिल था। हालांकि, दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, ग्रामीण रथ के नीचे कैसे आया और सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
परंपरा और आधुनिक व्यवस्था के बीच बढ़ती चुनौती
लगभग 600 वर्षों से चली आ रही बस्तर दशहरा की परंपरा आज भी हजारों लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है। समय के साथ पर्व के आयोजन और व्यवस्थाओं में आधुनिक बदलाव भी दिखाई दे रहे हैं। रथ खींचने के लिए जेसीबी के इस्तेमाल को लेकर उठे विवादों सहित इस वर्ष सामने आए विभिन्न मुद्दों ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर चर्चा को बढ़ाया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि परंपरा की मूल भावना को बनाए रखते हुए सुरक्षा के आधुनिक मानकों को किस तरह प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
नशे की स्थिति और सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच जरूरी
बस्तर दशहरा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल होते हैं। भीड़भाड़ वाले आयोजन में कुछ लोगों के नशे की हालत में शामिल होने की आशंका भी सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। हालांकि, इस हादसे में मृत ग्रामीण के नशे में होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे दुर्घटना का कारण मानना उचित नहीं होगा।
इसी तरह, रथ खींचने में शामिल लोगों के लिए निर्धारित पहचान चिह्न या सुरक्षा संबंधी शर्तों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है। यदि आयोजन में निर्धारित नियमों का पालन नहीं हुआ है, तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की चुनौती
बस्तर दशहरा पूरे बस्तर संभाग की आस्था और गौरव से जुड़ा पर्व है। इसमें ग्रामीणों की भागीदारी इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। ऐसे में सभी ग्रामीणों को परंपरा से अलग करना न तो व्यावहारिक समाधान है और न ही इस आयोजन की भावना के अनुरूप होगा।
हालांकि, रथ खींचने के दौरान सुरक्षा घेरा मजबूत करना, प्रशिक्षित और अधिकृत व्यक्तियों की तैनाती, भीड़ को नियंत्रित करना, नशे की हालत में लोगों को जोखिमपूर्ण गतिविधियों से दूर रखना तथा आपातकालीन सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
साथ ही, रथ खींचने की परंपरा में ग्रामीणों की भागीदारी बनाए रखते हुए सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्थानीय समुदाय, आयोजन समिति और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
हादसे की निष्पक्ष जांच जरूरी
भीतर रैनी रस्म के दौरान ग्रामीण की मौत की खबर ने पूरे आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। इसलिए यह जरूरी है कि प्रशासन घटना की परिस्थितियों की जांच करे और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बस्तर दशहरा की परंपरा और ग्रामीणों की आस्था का सम्मान करते हुए यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि उत्सव के दौरान किसी परिवार को इस तरह अपने प्रियजन को न खोना पड़े।