आयरन ओर मामले में सियासत गरम: गैदु का बड़ा सवाल—“दो लोगों पर FIR से कैसे होगी पूरी जांच?” बड़े आरोपियों को बचाने का आरोप, ट्रांसपोर्ट कंपनी से निजी यार्ड तक जांच की मांग

आयरन ओर मामले में सियासत गरम: गैदु का बड़ा सवाल—“दो लोगों पर FIR से कैसे होगी पूरी जांच?” बड़े आरोपियों को बचाने का आरोप, ट्रांसपोर्ट कंपनी से निजी यार्ड तक जांच की मांग
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

 28 अगस्त 2026 जगदलपुर :- नगरनार स्टील प्लांट के लिए भेजे गए 31.5 टन आयरन ओर को कथित तौर पर रास्ते में निजी यार्ड में उतारे जाने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के महामंत्री (संगठन एवं प्रशासन) मलकीत सिंह गैदु ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है। गैदु का आरोप है कि मामले में एफआईआर को केवल दो लोगों तक सीमित कर दिया गया है, जबकि पूरे परिवहन नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

गैदु ने सवाल उठाया कि यदि 31.5 टन आयरन ओर के परिवहन में कथित अनियमितता सामने आई है, तो जांच केवल वाहन चालक और निजी यार्ड से जुड़े व्यक्ति तक क्यों सीमित है? उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट कंपनी, वाहन मालिक, माल की निगरानी से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी और मामले से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

“दो लोगों पर FIR कर खानापूर्ति क्यों?”

कांग्रेस नेता गैदु ने कहा कि किसी मामले में FIR दर्ज होना जांच की शुरुआत है, अंत नहीं। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि एक ट्रक और दो लोगों पर FIR दर्ज करने के बाद क्या पुलिस पूरे मामले की तह तक जा रही है या जांच को सीमित रखने का प्रयास किया जा रहा है?

गैदु के मुताबिक, यह मामला केवल एक ट्रक से कथित तौर पर आयरन ओर उतारे जाने तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। यदि रेलवे साइडिंग से लंबे समय से आयरन ओर के परिवहन में किसी तरह की अनियमितता होती रही है, तो पिछले कई वर्षों के परिवहन रिकॉर्ड की जांच भी जरूरी है।

भाजपा विधायक के कथित दबाव की भी जांच की मांग

गैदु ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को कार्रवाई के दायरे से बाहर रखने को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने एक भाजपा विधायक के कथित दबाव में कुछ लोगों को बचाए जाने के आरोप की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक या प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में पुलिस की कार्रवाई सीमित की गई है, तो यह गंभीर विषय है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी नहीं माना जाना चाहिए और जांच तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।

“पुराने रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकता है बड़ा सच”

गैदु ने पुलिस प्रशासन और एनएमडीसी से मांग की कि मौजूदा मामले के साथ-साथ पिछले कई वर्षों में रेलवे साइडिंग से नगरनार स्टील प्लांट और अन्य गंतव्यों तक भेजे गए आयरन ओर के परिवहन की भी जांच की जाए।

उन्होंने जांच के दौरान वाहन नंबर, ई-परमिट, वजन पर्ची, ट्रांजिट रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, वाहन की GPS/मोबाइल लोकेशन, रेलवे साइडिंग के रिकॉर्ड और निजी यार्ड की आवक-जावक का मिलान कराने की मांग की।

गैदु का कहना है कि इन रिकॉर्ड्स को आपस में मिलाने से यह पता लगाया जा सकता है कि आयरन ओर कहां से लोड हुआ, किस वाहन में भेजा गया, वाहन किस मार्ग से गया, निजी यार्ड तक कैसे पहुंचा, वहां माल किसके निर्देश पर उतारा गया और उसके बाद माल का क्या हुआ।

“सिर्फ ड्राइवर और यार्ड से जुड़े व्यक्ति पर कार्रवाई से मामला खत्म नहीं होगा”

गैदु ने कहा कि कांग्रेस किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसाने की मांग नहीं कर रही है। उनकी मांग केवल इतनी है कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और तथ्य आधारित हो तथा जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी बड़े नेटवर्क, कारोबारी, बिचौलिए, ट्रांसपोर्टर अथवा प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

गैदु ने आशंका जताई कि यदि लंबे समय से आयरन ओर के परिवहन में इसी तरह की अनियमितताएं होती रही हैं, तो इससे एनएमडीसी को आर्थिक नुकसान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में पुराने परिवहन परमिट, वजन रिकॉर्ड, वाहनों की आवाजाही और निर्धारित गंतव्य तक माल पहुंचने से जुड़े दस्तावेजों का मिलान बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

“दो लोगों पर FIR से सवाल खत्म नहीं हुए, असली सवाल अब शुरू हुआ है”

गैदु ने पुलिस प्रशासन और एनएमडीसी से मामले की समयबद्ध जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि “दो लोगों पर एफआईआर दर्ज होने से सवाल खत्म नहीं हुए हैं, बल्कि असली सवाल अब शुरू हुआ है। आखिर बाकी लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और किसके दबाव में उन्हें बचाया जा रहा है?”

उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी एक व्यक्ति या एक वाहन तक सीमित न रखते हुए आयरन ओर की पूरी सप्लाई और परिवहन श्रृंखला की जांच की जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें और दोषियों की पहचान हो सके।