मुनुरकोंडा के जंगलों में ‘मौत का जखीरा’ बरामद! सरेंडर माओवादियों के इनपुट पर सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, भारी मात्रा में हथियार जब्त
24 अगस्त 2026 सुकमा :- सुकमा जिला के मुनुरकोंडा और भण्डारपदर के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ी बरामदगी की है। आत्मसमर्पित माओवादियों से मिले इनपुट के आधार पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन में जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया नक्सली डंप बरामद हुआ। डंप से बड़ी मात्रा में हथियार, कारतूस, विस्फोटक और अन्य सामग्री जब्त की गई है।
492 जिंदा कारतूस ने बढ़ाई बरामदगी की अहमियत
सुरक्षा बलों के मुताबिक डंप से एके-47, एसएलआर, इंसास और .303 रायफल से संबंधित 492 जिंदा कारतूस मिले हैं। इसके अलावा 240 जिलेटिन स्टिक, करीब 18 किलो गन पाउडर और 5 देशी हैंड ग्रेनेड भी बरामद किए गए। मौके से बड़ी संख्या में बीजीएल सेल, नक्सली वर्दी, सोलर प्लेट और दवाइयां भी मिली हैं।
सरेंडर माओवादियों के इनपुट से खुला राज
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पित माओवादियों से पूछताछ के दौरान मुनुरकोंडा और भण्डारपदर क्षेत्र में छिपाकर रखे गए नक्सली सामान को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी। इसके बाद जिला बल, डीआरजी और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने इलाके में एरिया डोमिनेशन और सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशन) रोहित शाह के निर्देशन में 24 अगस्त को चलाए गए अभियान के दौरान जवानों को जमीन के भीतर छिपाया गया डंप मिला। सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इसकी जांच कर विस्फोटक और अन्य सामग्री को सुरक्षित तरीके से बरामद किया गया।
पुराने नक्सली नेटवर्क की कड़ी होने की आशंका
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बरामद सामग्री लंबे समय से इलाके में सक्रिय नक्सली नेटवर्क द्वारा छिपाकर रखी गई हो सकती है। दुर्गम पहाड़ी और जंगल क्षेत्र होने के कारण यहां पहले से छिपाए गए हथियारों और विस्फोटकों की तलाश सुरक्षा बलों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है।
हथियारों के साथ आईईडी का खतरा भी बरकरार
सुरक्षा बलों के सामने सिर्फ नक्सली डंप तलाशने की चुनौती नहीं है। जंगल में पहले से लगाए गए आईईडी और अन्य विस्फोटकों को खोजकर सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करना भी अभियान का अहम हिस्सा है। जवान लगातार सर्चिंग और डिमाइनिंग अभियान चला रहे हैं, ताकि ग्रामीणों और सुरक्षा बलों की आवाजाही को सुरक्षित बनाया जा सके।
नक्सली नेटवर्क पर शिकंजा और कसने की तैयारी
मुनुरकोंडा की यह बरामदगी सुरक्षा बलों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आत्मसमर्पित माओवादियों से मिले इनपुट के जरिए नक्सलियों के पुराने ठिकानों और छिपे हुए हथियारों तक पहुंच बनाई जा रही है। सुरक्षा बल अब इलाके में ऐसे अन्य संभावित डंप और आईईडी की तलाश में जुटे हैं।
फिलहाल मुनुरकोंडा और आसपास के जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा बलों की नजर उन सभी संभावित ठिकानों पर है, जहां नक्सली हथियार या विस्फोटक छिपाकर रख सकते हैं।