चक्रवात की आहट के बीच खातीगुडा डैम के दो गेट खुले, बस्तर में इंद्रावती नदी के जलस्तर को लेकर सतर्कता
25 अक्टूबर 2026 बस्तर/जगदलपुर :- ओडिशा के नवरंगपुर स्थित खातीगुडा बांध से छोड़ा जा रहा पानी; संभावित भारी बारिश के मद्देनजर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह
बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश की चेतावनी के बीच ओडिशा के नवरंगपुर जिले में स्थित खातीगुडा डैम (इंद्रावती जलाशय) के दो गेट एहतियातन खोल दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, बांध के गेट नंबर 3 और 6 से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इंद्रावती नदी के जलस्तर पर नजर रखने की जरूरत बढ़ गई है।
जलाशय का जलस्तर पूर्ण क्षमता के करीब
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, खातीगुडा डैम का वर्तमान जलस्तर 640.9 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि इसकी पूर्ण जल संग्रहण क्षमता 642 मीटर है। जलाशय में पानी का स्तर नियंत्रित रखने के उद्देश्य से दोनों गेटों के माध्यम से 133 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई है। जलस्तर घटकर 639 मीटर तक पहुंचने पर गेट बंद करने पर विचार किया जाएगा।
हालांकि, पानी की निकासी और जलाशय के स्तर में बदलाव मौसम की स्थिति तथा बांध प्रबंधन के निर्णयों पर निर्भर करेगा।
बंगाल की खाड़ी में मौसम प्रणाली से बढ़ी चिंता
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा मौसम तंत्र चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके 28 अक्टूबर के आसपास उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटवर्ती क्षेत्रों के पास पहुंचने की संभावना जताई गई है। संभावित चक्रवात के कारण इन क्षेत्रों में भारी बारिश होने की आशंका के बीच जलाशय प्रबंधन और नदी के जलस्तर पर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।
बस्तर और जगदलपुर के नदी तटीय इलाकों में सतर्कता जरूरी
इंद्रावती नदी बस्तर क्षेत्र के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। ओडिशा स्थित जलाशय से पानी छोड़े जाने और संभावित बारिश के कारण नदी के प्रवाह तथा जलस्तर में बदलाव की आशंका को देखते हुए बस्तर और जगदलपुर के निचले एवं नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
नदी में पानी का वास्तविक स्तर केवल बांध से छोड़े जा रहे पानी पर निर्भर नहीं करता, बल्कि स्थानीय बारिश, सहायक नदियों के प्रवाह और अन्य जल निकासी स्थितियों से भी प्रभावित होता है। इसलिए किसी भी संभावित खतरे का आकलन स्थानीय प्रशासन और जल संसाधन विभाग की निगरानी के आधार पर किया जाना चाहिए।
नदी किनारे जाने से बचें, प्रशासनिक निर्देशों का करें पालन
संभावित बारिश और जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए नदी किनारे, घाटों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। नदी में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में स्नान, मछली पकड़ने, पशुओं को पानी पिलाने या अन्य गतिविधियों के लिए नदी में उतरना जोखिम भरा हो सकता है।
लोगों को सलाह दी जाती है कि वे जलस्तर में बदलाव की जानकारी लेते रहें, नदी के तेज बहाव वाले हिस्सों से दूर रहें और प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करें। जलभराव की स्थिति बनने पर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए तैयार रहें।
इन आंकड़ों पर रखें नजर
- बांध: खातीगुडा इंद्रावती जलाशय, नवरंगपुर, ओडिशा
- खोले गए गेट: नंबर 3 और 6
- बताया गया जल डिस्चार्ज: 133 क्यूसेक
- वर्तमान जलस्तर: 640.9 मीटर
- पूर्ण जल संग्रहण क्षमता: 642 मीटर
- गेट बंद करने पर विचार: जलस्तर 639 मीटर तक आने पर
- संभावित मौसम प्रभाव: 28 अक्टूबर के आसपास ओडिशा-आंध्र प्रदेश तट के पास चक्रवाती सिस्टम पहुंचने की आशंका
महत्वपूर्ण सूचना: बांध के गेटों की मौजूदा स्थिति, पानी छोड़ने की वास्तविक मात्रा और बस्तर में नदी के जलस्तर को लेकर नवीनतम आधिकारिक जानकारी की पुष्टि संबंधित जल संसाधन विभाग एवं जिला प्रशासन से की जानी चाहिए। फिलहाल लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की आवश्यकता है।