बस्तर में बड़ा नक्सली सरेंडर, 3 करोड़ 95 लाख के इनामी 108 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण  3 करोड़ 60 लाख रुपये 1 किलो सोना सहित भारी मात्रा में हथियार भी बरामद 

बस्तर में बड़ा नक्सली सरेंडर, 3 करोड़ 95 लाख के इनामी 108 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण  3 करोड़ 60 लाख रुपये 1 किलो सोना सहित भारी मात्रा में हथियार भी बरामद 
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

11 मार्च 2026 जगदलपुर :-  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। जगदलपुर में 108 माओवादी कैडर ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी नक्सलियों पर सरकार ने कुल 3 करोड़ 95 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। बड़ी संख्या में नक्सलियों के सरेंडर को बस्तर क्षेत्र में नक्सल नेटवर्क के कमजोर पड़ने का संकेत माना जा रहा है।

प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के कारण लगातार नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक प्रदेश से नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा करना है। जगदलपुर में सरेंडर करने वाले माओवादियों में DVCM के 6, CYPCM के 3, PPCM के 18, ACM के 23 और 56 पार्टी सदस्य शामिल हैं।

अलग-अलग जिलों से आए नक्सली

सरेंडर करने वाले नक्सलियों में बस्तर संभाग के कई जिलों के कैडर शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार बीजापुर से 37, नारायणपुर से 4, बस्तर से 16, कांकेर से 3, सुकमा से 18 और दंतेवाड़ा से 30 माओवादी शामिल हैं। इन सभी पर अलग-अलग मामलों में सरकार की ओर से इनाम घोषित था।

हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

सुरक्षाबलों को नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद हुए हैं। बरामद हथियारों में 6 AK-47 राइफल, 11 INSAS राइफल, 5 कार्बाइन, 20 एलएमजी, 25 .303 राइफल, 11 बारह बोर राइफल और 13 .315 बोर राइफल शामिल हैं। कुल मिलाकर 101 हथियार बरामद किए गए हैं।

करोड़ों की नकदी और सोना मिला

नक्सलियों के ठिकाने से सुरक्षाबलों को अब तक का सबसे बड़ा डंप भी मिला है। इस डंप से करीब 3 करोड़ 60 लाख रुपए नकद और एक किलो सोना बरामद किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक यह नक्सल विरोधी अभियानों में बरामद सबसे बड़ा डंप माना जा रहा है।

नक्सल नेटवर्क पर बड़ा असर

सुरक्षाबलों के लगातार अभियानों और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सल संगठन की पकड़ कमजोर होती जा रही है। अधिकारियों के अनुसार अब इस क्षेत्र में माओवादियों की केवल चार एरिया कमेटियां ही सक्रिय बची हैं। 

मुख्यधारा में लौट रहे पूर्व नक्सली

सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता और सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें। इससे पहले आत्मसमर्पण कर चुके कई नक्सलियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए उन्हें विधानसभा की कार्यवाही भी दिखाई गई थी। माना जा रहा है कि बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर क्षेत्र में शांति और विकास के लिए अहम साबित होगा।