आरोप-प्रत्यारोप के बीच दम तोड़ता दलपत सागर! जलकुंभी से पट गया बस्तर का ऐतिहासिक धरोहर, शहरवासियों की महापौर से बड़ी उम्मीद
29 मई 2026 जगदलपुर :- बस्तर की पहचान और ऐतिहासिक विरासत माने जाने वाला दलपत सागर इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। कभी अपनी सुंदरता, शांत जलराशि और मनमोहक सूर्यास्त के लिए पहचाना जाने वाला दलपत सागर अब जलकुंभी, पानी के भीतर उग आए पौधों और गंदगी की चादर में घिरता दिखाई दे रहा है। शहरवासियों का कहना है कि हालात ऐसे हो चुके हैं कि कई हिस्सों में पानी तक दिखाई नहीं देता, सिर्फ हरी परत और जलीय खरपतवार नजर आते हैं।
सुबह मॉर्निंग वॉक और शाम की इवनिंग वॉक के लिए आने वाले नागरिकों में इस स्थिति को लेकर गहरी नाराजगी और चिंता देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकारें बदलती रहीं, योजनाएं बनीं, सौंदर्यीकरण के दावे हुए, लेकिन दलपत सागर की मूल समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। नागरिकों का आरोप है कि हर बार राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप तो खूब होते हैं, लेकिन ऐतिहासिक जलाशय को बचाने की गंभीर पहल जमीन पर नजर नहीं आती।
पावर हाउस चौक निवासी आशीष, जो प्रतिदिन अपनी पत्नी के साथ यहां सुबह-शाम टहलने आते हैं, कहते हैं कि “स्थिति देखकर मन दुखी हो जाता है। पानी नजर ही नहीं आता, ऐसा लगता है जैसे पूरा तालाब जलकुंभी ने निगल लिया हो। कभी यहां बैठना और घूमना सुकून देता था, लेकिन अब चिंता होती है कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियां इस खूबसूरती को शायद देख भी न पाएं।”
इवनिंग वॉक करने वाले अन्य नागरिकों ने भी कहा कि पहले की तुलना में हालात अब और ज्यादा खराब हो चुके हैं। उनका कहना है कि दलपत सागर की लगातार अनदेखी की जा रही है और समय रहते बड़े स्तर पर सफाई, जलकुंभी हटाने और संरक्षण का काम नहीं हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

युवा सोनम बताती हैं कि वह अक्सर अपने दोस्तों के साथ यहां घूमने आती हैं। उनके मुताबिक, “जब शाम के समय सूर्य अस्त होता है तो दलपत सागर का नजारा बेहद खूबसूरत लगता है। लेकिन अब यहां की स्थिति देखकर दुख होता है। यह सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि शहर की पहचान है। इसे बचाना जरूरी है।”
शहरवासियों का कहना है कि दलपत सागर केवल एक तालाब नहीं बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत है। वर्षों से यह शहर के सामाजिक जीवन, पर्यटन और स्थानीय पहचान का केंद्र रहा है। शाम के समय यहां जुटने वाली भीड़, परिवारों की आवाजाही, युवाओं की मौजूदगी और बुजुर्गों की सैर इस स्थान की जीवंतता को दर्शाती है। लेकिन अब यही स्थान उपेक्षा और बदहाली का प्रतीक बनता जा रहा है।
हालांकि नागरिकों के बीच निराशा के साथ उम्मीद भी दिखाई देती है। स्थानीय नागरिक नकुल का कहना है कि उन्हें महापौर संजय पांडे से काफी अपेक्षाएं हैं। उनका मानना है कि ऊर्जावान कार्यशैली और सक्रियता के कारण महापौर अपने कार्यकाल में दलपत सागर को नई पहचान देने की दिशा में ठोस कदम उठा सकते हैं। कई अन्य नागरिकों ने भी विश्वास जताया कि यदि गंभीरता से योजना बनाकर सफाई, संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर काम किया जाए तो दलपत सागर फिर से अपनी पुरानी सुंदरता वापस पा सकता है।
शहरवासियों की मांग है कि दलपत सागर में फैली जलकुंभी को तत्काल हटाया जाए, जल संरक्षण की वैज्ञानिक योजना बनाई जाए, नियमित सफाई हो और इसे पर्यटन व विरासत स्थल के रूप में विकसित करने के साथ इसकी प्राकृतिक सुंदरता को भी सुरक्षित रखा जाए। लोगों का कहना है कि यह वक्त राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि समाधान का है—क्योंकि यदि अब भी ध्यान नहीं दिया गया, तो बस्तर की यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे सिर्फ यादों में सिमट सकती है।