सुरजागढ़ माइंस के भारी वाहनों से कापसी बाजार पर बढ़ा संकट, धूल, जाम और जर्जर सड़क से बड़े हादसे की आशंका स्टेट हाईवे-25 पर ओवरलोड डंपरों की लगातार आवाजाही से जनजीवन प्रभावित,

सुरजागढ़ माइंस के भारी वाहनों से कापसी बाजार पर बढ़ा संकट, धूल, जाम और जर्जर सड़क से बड़े हादसे की आशंका स्टेट हाईवे-25 पर ओवरलोड डंपरों की लगातार आवाजाही से जनजीवन प्रभावित,
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

13 जुलाई 2026 कांकेर रिपोर्टर : उत्तम बनिक, बांदे कापसी। महाराष्ट्र के सुरजागढ़ माइंस से निकलने वाले भारी-भरकम 18 चक्का डंपरों की लगातार आवाजाही ने कापसी बाजार और स्टेट हाईवे-25 पर रहने वाले हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेष रूप से रविवार को बाजार में भारी वाहनों की लंबी कतारों के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। धूल के गुबार, सड़क पर लगने वाले जाम और जर्जर सड़क व संकीर्ण पुल-पुलियों की स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोग किसी बड़े हादसे की आशंका जता रहे हैं।

स्थानीय व्यापारियों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि माइंस से खनिज परिवहन के दौरान लागू सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी नियमों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि घनी आबादी और बाजार क्षेत्र से होकर गुजरने वाले परिवहन मार्ग पर नियमित पानी का छिड़काव किया जाना आवश्यक है, ताकि धूल प्रदूषण पर नियंत्रण रखा जा सके। लेकिन कापसी बाजार में लंबे समय से इस व्यवस्था की अनदेखी की जा रही है। इसके चलते सड़क किनारे स्थित दुकानों, राहगीरों, स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि तेज रफ्तार और भारी वजन वाले डंपरों के गुजरने से पूरे बाजार में धूल का गुबार छाया रहता है। इससे न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि स्थानीय व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। दुकानदारों के अनुसार दिनभर उड़ने वाली धूल के कारण ग्राहकों की आवाजाही कम हो रही है और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।

क्षेत्रवासियों ने स्टेट हाईवे-25 की बदहाल स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि परलकोट क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग इस सड़क के चौड़ीकरण और उन्नयन की रही है, लेकिन आज भी कई स्थानों पर सड़क संकरी है तथा तीन से चार पुल एवं पुलिया जर्जर अवस्था में हैं। ऐसे में प्रतिदिन सैकड़ों ओवरलोड डंपरों का आवागमन इन संरचनाओं पर अतिरिक्त दबाव बना रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी परीक्षण और आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में किसी पुल या पुलिया को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।

स्थानीय लोगों ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि संबंधित विभागों को यह जानकारी है कि यह मार्ग भारी खनिज परिवहन के लिए निर्धारित नहीं है, तो फिर इसी रास्ते से लगातार परिवहन कैसे किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि संबंधित विभागों की निष्क्रियता के कारण ओवरलोड वाहनों का संचालन निर्बाध रूप से जारी है।

ग्रामीणों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि भारी वाहनों के लिए तत्काल वैकल्पिक परिवहन मार्ग निर्धारित किया जाए, धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए, ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा स्टेट हाईवे-25 की सड़क और संकीर्ण पुल-पुलियों का तकनीकी परीक्षण कर आवश्यक मरम्मत एवं चौड़ीकरण कराया जाए।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जनता आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगी। लोगों का मानना है कि प्रशासन को किसी संभावित दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले से ही आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने चाहिए, ताकि जनजीवन सुरक्षित रह सके।