1.5 करोड के एलपीजी घोटाले में बड़ा एक्शन, कोल्हापुर से दबोचे गए कारोबारी पिता-पुत्रमहासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई से खुली गैस हेराफेरी की परतें
29 मई 2026 रायपुर :- छत्तीसगढ़ के महासमुंद में सामने आए करीब 1.5 करोड रुपए के एलपीजी घोटाले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। लंबे समय से फरार चल रहे ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष सिंह ठाकुर और उनके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर महासमुंद लाया गया है, जहां पुलिस उनसे लगातार पूछताछ कर रही है।

खाद्य अधिकारी पर लगा पूरे रैकेट का संचालन करने का आरोप
जांच के दौरान इस मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक खाद्य अधिकारी अजय यादव पूरे गैस चोरी नेटवर्क का मुख्य संचालक था। आरोप है कि एलपीजी से भरे कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा दिलाने, फर्जी तौल पंचनामा तैयार कराने और दस्तावेजों में हेराफेरी करने में उसकी अहम भूमिका रही।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि खाद्य विभाग कार्यालय में ही फर्जी पंचनामों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके अलावा गैस स्टॉक को जल्द खाली दिखाने और वास्तविक तौल प्रक्रिया से बचने के लिए भी सुनियोजित साजिश रची गई थी।
11 शहरों में तलाश, लगातार बदल रहे थे लोकेशन
महासमुंद एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से अजय यादव की भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई है। वहीं मुख्य आरोपी संतोष ठाकुर और उनका बेटा गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार रायपुर, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर सहित कई शहरों में ठिकाने बदल रहे थे।

पुलिस टीम ने 11 शहरों में टावर डंप, सीडीआर एनालिसिस, टोल प्लाजा डेटा और सोशल मीडिया ट्रैकिंग के जरिए दोनों आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी।
कोल्हापुर के होटल में छिपे थे आरोपी, पुलिस ने दबिश देकर पकड़ा
आखिरकार महासमुंद पुलिस को सूचना मिली कि दोनों आरोपी कोल्हापुर के एक होटल में छिपे हुए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस की मदद से संयुक्त कार्रवाई करते हुए पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच में अब तक करीब 87 टन एलपीजी गैस की हेराफेरी सामने आई है। आरोप है कि आरोपियों ने आपदा की स्थिति का फायदा उठाकर बिना जीएसटी के गैस अलग-अलग एजेंसियों और संस्थानों को बेची।
खरीद 40 टन, बिक्री 135 टन, आंकड़ों ने खोली पूरी पोल
पुलिस जांच में सबसे बड़ा खुलासा गैस खरीद और बिक्री के आंकड़ों से हुआ है। रिकॉर्ड में अप्रैल महीने के दौरान केवल 40 टन गैस खरीदी दिखायी गई, जबकि बिक्री करीब 135 टन तक दर्ज मिली। इसी गड़बड़ी ने पूरे एलपीजी घोटाले की परतें खोल दीं।