रायपुर टिकरापारा गोलीकांड में रोहित तोमर बरी, कोर्ट ने कहा- पुख्ता सबूत नहीं, फर्नीचर विवाद को लेकर हुई थी हत्या
10 अप्रैल 2026 रायपुर :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 2013 में हुए चर्चित गोलीकांड मामले में कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरज शर्मा की कोर्ट ने आरोपी वीरेंद्र सिंह उर्फ रूबी सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को ठोस और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करने में असफल रहा।
मामला रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र स्थित चौसिया कॉलोनी का था। फर्नीचर कारोबारी मोहम्मद हबीब खान को वीरेंद्र सिंह ने अपनी बहन की शादी के लिए करीब 48 हजार रुपये का फर्नीचर तैयार करने का ऑर्डर दिया था। इस सौदे में 5 हजार रुपये एडवांस के रूप में दिए गए थे, जबकि 43 हजार रुपये देने बाकी थे।
पैसों को लेकर था विवाद
फर्नीचर के बचे हुए भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया, जो धीरे-धीरे बढ़ता चला गया। बताया जाता है कि 13 अगस्त 2013 को हबीब खान अपने कुछ साथियों के साथ बकाया राशि के विवाद के चलते फर्नीचर वापस लेने के लिए वीरेंद्र सिंह तोमर के घर पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और स्थिति मारपीट तक पहुंच गई।
गोली चलाने से नौशाद आलम की हुई थी मौत
अभियोजन के मुताबिक, इसी दौरान वीरेंद्र सिंह ने पिस्टल से हबीब खान पर गोली चलाई, जो उन्हें नहीं लगी। हालांकि, पीछे खड़े नौशाद आलम उर्फ असलम को गोली लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच की। मौके से साक्ष्य एकत्र किए गए, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और आरोपी के कब्जे से पिस्टल भी बरामद कर उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।
टिकरापारा थाना क्षेत्र में गोलीकांड में बड़ा फैसला
कोर्ट ने वीरेन्द्र सिंह तोमर को किया आरोप मुक्त
पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कोर्ट ने सुनाया फैसला
फर्नीचर के पैसे को लेकर था विवाद
कोर्ट ने सुनाया फैसला
सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद प्रकरण को ट्रायल के लिए अदालत में प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान पर्याप्त और विश्वसनीय नहीं हैं। इसी आधार पर संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त करार दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता शशांक मिश्रा ने कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों का गहन परीक्षण करने के बाद यह फैसला सुनाया है।