विश्व आदिवासी दिवस बस्तर सहित पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया गया,बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में उमड़ा आदिवासी समाज का जनसैलाब, रैली में दिखी एकता, संस्कृति और स्वाभिमान की ताकत
10 अगस्त 2026 जगदलपुर :- विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में आदिवासी समाज की ओर से विशाल रैली का आयोजन किया गया। रैली में बस्तर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व आदिवासी समाज सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और समाज के विभिन्न वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
पारंपरिक वेशभूषा, लोक संस्कृति, पारंपरिक आभूषण, सांस्कृतिक प्रतीकों और सामुदायिक एकजुटता के साथ निकली इस विशाल रैली ने जगदलपुर शहर में बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरव की प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की।
वहीं, विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बस्तर सहित पूरे भारतवर्ष में विभिन्न स्थानों पर आदिवासी समाज द्वारा कार्यक्रम, रैलियां, सांस्कृतिक आयोजन और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर उत्साहपूर्वक दिवस मनाया गया।
जगदलपुर में उमड़ा आदिवासी समाज का जनसैलाब
जगदलपुर में आयोजित रैली में बस्तर जिले के अलग-अलग ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। रैली में शामिल लोगों के चेहरों पर उत्साह और अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति गर्व साफ दिखाई दे रहा था।
पारंपरिक परिधान और आभूषणों से सजे महिला-पुरुष, युवा और वरिष्ठजन बड़ी संख्या में रैली का हिस्सा बने। जगह-जगह लोगों ने रैली का स्वागत किया। पूरे आयोजन के दौरान आदिवासी समाज की एकता, सामाजिक चेतना और अपनी संस्कृति तथा अधिकारों के प्रति जागरूकता प्रमुख रूप से दिखाई दी।
पारंपरिक वेशभूषा में दिखी बस्तर की समृद्ध संस्कृति
रैली की सबसे बड़ी विशेषता आदिवासी समाज की पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक स्वरूप रहा। बस्तर की पारंपरिक जीवनशैली, लोक संस्कृति और रीति-रिवाजों की झलक रैली के दौरान दिखाई दी।
पारंपरिक परिधानों और आभूषणों से सजे समाज के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व का प्रदर्शन किया। रैली के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि आधुनिकता और विकास के साथ अपनी जड़ों, परंपराओं, भाषा और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।
केवल उत्सव नहीं, अधिकारों और सम्मान का भी दिवस
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यह दिन केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, सम्मान, स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए संकल्प लेने का दिन भी है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ और बस्तर की पहचान तथा गौरव का अभिन्न हिस्सा है। बस्तर की संस्कृति, परंपराएं और सामाजिक जीवन आदिवासी समुदायों की समृद्ध विरासत से गहराई से जुड़े हुए हैं।
जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प
रैली के माध्यम से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया। समाज के लोगों ने कहा कि प्राकृतिक संसाधन आदिवासी जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।
जंगल केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक जीवन व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। रैली में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगल एवं जलस्रोतों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर
आयोजन के दौरान आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और उनके प्रभावी संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के अधिकारों की जानकारी प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है।
शिक्षा, जागरूकता और संवैधानिक अधिकारों की समझ के माध्यम से समाज को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विकास के अवसरों तक आदिवासी समाज की पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी बताई गई।
युवाओं और महिलाओं की रही बड़ी भागीदारी
विशाल रैली में युवाओं और महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक वेशभूषा में रैली में शामिल हुए और अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए सामाजिक एकजुटता का परिचय दिया। वरिष्ठजनों ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और इतिहास से जोड़ना आज के समय की बड़ी आवश्यकता है।
जगदलपुर की सड़कों पर दिखा बस्तर का सांस्कृतिक गौरव
बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर की सड़कों पर निकली विशाल रैली ने आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति को बड़े मंच पर प्रस्तुत किया। पारंपरिक वेशभूषा, आभूषणों और सांस्कृतिक प्रतीकों से सजी रैली ने शहरवासियों का ध्यान आकर्षित किया।
रैली में शामिल लोगों की संख्या, पारंपरिक वेशभूषा और सामुदायिक उत्साह ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। इस दौरान यह संदेश भी सामने आया कि आदिवासी संस्कृति केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी जीवंत परंपरा है।