झीरम पर सोनी सोरी के तीखे सवाल: “10 दोषियों को सजा के बाद क्या पूरी सच्चाई सामने आ गई?”
23 सितंबर 2026 जगदलपुर :- झीरम घाटी मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी ने बुधवार को बस्तर जिला पत्रकार संघ, जगदलपुर में प्रेसवार्ता कर NIA, अदालत और सरकार के समक्ष कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके सवाल किसी आरोपी के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि निष्पक्ष जांच, न्यायिक प्रक्रिया और झीरम घाटी मामले की पूरी तस्वीर सामने आने से जुड़े हैं।
झीरम घाटी हमले में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले को निशाना बनाया गया था। NIA के आधिकारिक केस रिकॉर्ड के अनुसार इस हमले में 27 लोगों की मौत हुई, जिनमें 10 पुलिसकर्मी शामिल थे, जबकि 38 लोग घायल हुए थे। NIA ने 2014 में नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और 2015 में 30 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किए जाने का उल्लेख किया है। NIA के रिकॉर्ड में फरार आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच जारी बताई गई है।
हाल ही में विशेष NIA अदालत, जगदलपुर ने 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने 5 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था और 16 सितंबर को सजा सुनाई। मृत्युदंड की पुष्टि के लिए आगे हाईकोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया भी आवश्यक है।
“हर अभियुक्त की भूमिका और साक्ष्य अलग-अलग स्पष्ट हों”
सोनी सोरी ने सवाल उठाया कि जिन 10 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है, क्या फैसले में प्रत्येक की व्यक्तिगत भूमिका और उसके खिलाफ निर्णायक साक्ष्यों को अलग-अलग स्पष्ट किया गया है?
उन्होंने NIA से पूछा कि प्रत्येक दोषसिद्ध अभियुक्त के खिलाफ कौन-कौन से गवाह, दस्तावेजी, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश किए गए तथा उनकी कथित भूमिका किस आधार पर स्थापित हुई।
उनका सवाल यह भी था कि यदि अभियोजन का मामला आपराधिक षड्यंत्र और सामूहिक उद्देश्य जैसे कानूनी प्रावधानों पर आधारित है, तो प्रत्येक अभियुक्त की व्यक्तिगत भागीदारी किस साक्ष्य से स्थापित हुई, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।
DNA, कॉल रिकॉर्ड और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भी सवाल
प्रेसवार्ता में सोनी सोरी ने DNA, biological material, call records तथा अन्य वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पूछा कि इन साक्ष्यों में से कौन-कौन से साक्ष्य जांचे गए, अदालत में किस प्रकार प्रमाणित हुए और फैसले में उनका महत्व किस तरह निर्धारित किया गया।
उन्होंने मृत्युदंड के संदर्भ में यह भी सवाल उठाया कि प्रत्येक अभियुक्त के मामले में परिस्थितियों का अलग-अलग मूल्यांकन और aggravating तथा mitigating circumstances पर विचार किस प्रकार किया गया।
“10 को सजा के बाद क्या झीरम की पूरी तस्वीर सामने आई?”
सोनी सोरी ने NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पूछा कि जब रिकॉर्ड में फरार आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच जारी बताई गई है, तो 13 साल बाद उस जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
NIA के केस रिकॉर्ड में 2014 की पहली चार्जशीट और 2015 की सप्लीमेंट्री चार्जशीट का उल्लेख है तथा फरार आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच जारी बताई गई है।
उन्होंने NIA से पूछा—
वर्तमान में कितने आरोपी फरार या वांछित हैं?
2015 की सप्लीमेंट्री चार्जशीट के बाद जांच में क्या प्रगति हुई?
क्या प्रत्येक दोषसिद्ध अभियुक्त के खिलाफ साक्ष्यों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाएगा?
क्या जांच केवल अभियोजन और दोषसिद्धि तक सीमित थी या पूरी योजना, कमांड संरचना और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच भी जारी है?
लंबित जांच किस चरण में है?
हालिया रिपोर्टों में भी अदालत के फैसले के बावजूद मामले में अन्य वांछित आरोपियों और व्यापक जांच को लेकर सवाल उठने की बात सामने आई है।
सरकार से भी मांगी स्पष्ट स्थिति
सोनी सोरी ने सरकार से पूछा कि यदि NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड में फरार आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच जारी है, तो उसकी वर्तमान स्थिति जनता के सामने कब रखी जाएगी।
उन्होंने सवाल किया—
“क्या 10 लोगों को मृत्युदंड मिलना ही झीरम मामले की पूरी जांच का अंत है, या बाकी आरोपियों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच अभी भी जारी है?”
उन्होंने पीड़ित परिवारों को केवल अदालत के फैसले की जानकारी देने के बजाय जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।
“मैं किसी के पक्ष में नहीं, न्याय और निष्पक्ष प्रक्रिया के पक्ष में हूं”
सोनी सोरी ने कहा कि वह यह दावा नहीं कर रही हैं कि मामले में कोई साक्ष्य नहीं है। उनका सवाल यह है कि प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका किस साक्ष्य से स्थापित हुई, प्रत्येक अभियुक्त का अलग-अलग मूल्यांकन किस तरह हुआ और जिन अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच लंबित बताई जा रही है, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।
उन्होंने कहा कि झीरम घाटी में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। उनके अनुसार न्याय की प्रक्रिया में साक्ष्यों की स्पष्टता, निष्पक्ष जांच, प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का निर्धारण और पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा—“मैं किसी के पक्ष में नहीं हूं—मैं न्याय, कानून और निष्पक्ष प्रक्रिया के पक्ष में हूं।”
फैसले के बाद आगे क्या?
विशेष NIA अदालत ने सितंबर 2026 में 10 आरोपियों को दोषी ठहराने के बाद सभी को मृत्युदंड सुनाया। रिपोर्टों के अनुसार दोषसिद्धि IPC, UAPA, Arms Act और Explosive Substances Act की विभिन्न धाराओं के तहत हुई। मृत्युदंड के मामलों में आगे हाईकोर्ट में अपील और सजा की पुष्टि की न्यायिक प्रक्रिया होती है।
इस बीच, सोनी सोरी द्वारा उठाए गए सवालों का केंद्र यही है कि अदालत द्वारा दोषसिद्ध 10 अभियुक्तों के खिलाफ साक्ष्यों और व्यक्तिगत भूमिकाओं की स्थिति क्या है तथा NIA के रिकॉर्ड में दर्ज लंबित जांच और फरार आरोपियों की वर्तमान स्थिति क्या है।