झीरम केस में फिर गरमाई कानूनी जंग! 10 दोषियों की फांसी को हाईकोर्ट में चुनौती, अब अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
24 सितम्बर 2026 जगदलपुर :- 13 साल पुराने बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद अब कानूनी लड़ाई अगले पड़ाव पर पहुंच गई है। NIA कोर्ट के फैसले के खिलाफ बचाव पक्ष की अपील, अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने दाखिल की याचिका 10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को बचाव पक्ष ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने दोषियों के परिजनों से चर्चा के बाद अपील दाखिल की है। अब हाईकोर्ट की ओर से आगे की न्यायिक प्रक्रिया और नोटिस का इंतजार है।
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 5 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था, जिसके बाद 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। अदालत ने हाईकोर्ट में चुनौती के लिए 30 दिन का समय दिया था।
अब हाईकोर्ट में होगी फैसले की अगली परीक्षा
बचाव पक्ष की अपील के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगी। हाईकोर्ट में निचली अदालत के फैसले और मृत्युदंड से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुनवाई होगी। मृत्युदंड के मामलों में उच्च न्यायालय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और निचली अदालत की सजा पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया वहीं से तय होती है।
2013 के हमले ने हिला दिया था बस्तर
25 मई 2013 को दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार इस घटना में 29 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए थे।
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला सुकमा के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार करीब शाम 4:15 बजे हमला हुआ, जिसमें माओवादियों ने काफिले पर हमला कर भारी गोलीबारी की। हमले में 29 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए थे। NIA के मुताबिक हमलावरों ने हथियार और अन्य सामान भी लूटे थे।
कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं की हुई थी मौत
झीरम हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई शीर्ष नेता मारे गए। इनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और विधायक योगेंद्र शर्मा प्रमुख नाम हैं। हमले में सुरक्षा बलों के जवानों और अन्य कार्यकर्ताओं की भी जान गई। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार विद्याचरण शुक्ल हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में 11 जून 2013 को उनका निधन हुआ।
इन सभी 10 दोषियों को मिली थी मृत्युदंड की सजा
इस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं। सभी आरोपी वर्तमान में केंद्रीय जेल में बंद हैं। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी, जिसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। NIA ने वर्ष 2015 में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी कांड
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला सुकमा के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार करीब शाम 4:15 बजे हमला हुआ, जिसमें माओवादियों ने काफिले पर हमला कर भारी गोलीबारी की। हमले में 29 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए थे। NIA के मुताबिक हमलावरों ने हथियार और अन्य सामान भी लूटे थे।
कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं की हुई थी मौत
झीरम हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई शीर्ष नेता मारे गए। इनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और विधायक योगेंद्र शर्मा प्रमुख नाम हैं। हमले में सुरक्षा बलों के जवानों और अन्य कार्यकर्ताओं की भी जान गई। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार विद्याचरण शुक्ल हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में 11 जून 2013 को उनका निधन हुआ।
13 साल बाद फैसला, अब हाईकोर्ट की बारी
झीरम घाटी मामले में करीब 13 साल चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद NIA अदालत का फैसला आया, लेकिन मृत्युदंड के खिलाफ अपील दाखिल होने के साथ ही मामला अब उच्च न्यायालय की चौखट पर पहुंच गया है। ऐसे में हाईकोर्ट में होने वाली अगली कार्रवाई इस मामले की कानूनी दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगी।