सांप के काटने के बाद कोमा में पहुंचा बच्चा, 6.2 हीमोग्लोबिन और ब्रेन मलेरिया से जूझते हुए डॉक्टरों ने बचाई जान
27 अगस्त 2026 जगदलपुर :- बीजापुर जिला अस्पताल से बेहद गंभीर हालत में रेफर किए गए एक बच्चे को डिमरापाल स्थित शहीद महेन्द्र कर्मा स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध अस्पताल (मेकाज) के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में गहन उपचार देकर चिकित्सकों ने उसकी हालत में सुधार किया है। अस्पताल के चिकित्सकीय विवरण के अनुसार बच्चे को संभावित करैत सांप (Krait) के काटने के बाद अस्पताल लाया गया था और उस समय उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी।

चिकित्सकीय रिकॉर्ड के मुताबिक 22 अगस्त 2026 की शाम लगभग 4:30 बजे बच्चे को जिला अस्पताल बीजापुर से रेफर कर मेकाज लाया गया। बच्चे को अस्पताल लाए जाने के समय वह गैस्पिंग (Gasping) अवस्था में था। अत्यधिक गंभीर एनीमिया और रेस्पिरेटरी फेलियर के चलते तत्काल उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर में उपचार शुरू किया गया।
एक साथ कई गंभीर जटिलताओं से जूझ रहा था बच्चा
अस्पताल के दस्तावेज में बच्चे के संबंध में संभावित करैत सांप के काटने, कोमा तथा एस्पिरेशन निमोनिया का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा बच्चे को गंभीर एनीमिया भी था। जांच में उसके रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा महज 6.2 ग्राम/डेसीलीटर दर्ज की गई थी।
बच्चे में Peripheral Circulatory Insufficiency यानी शरीर के बाहरी हिस्सों में रक्त संचार की गंभीर कमी भी पाई गई। इसके साथ ही वह फाल्सीपेरम मलेरिया/ब्रेन मलेरिया से भी पीड़ित था। इन सभी गंभीर परिस्थितियों के कारण बच्चे को PICU में लगातार चिकित्सकीय निगरानी और गहन उपचार की आवश्यकता पड़ी।
तीन दिनो तक वेंटिलेटर पर रखा गया
अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार बच्चे को लगभग 3 दिनों तक पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेशन पर रखा गया। इस दौरान करीब 30 घंटे इनवेसिव वेंटिलेटर तथा 42 घंटे नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर (CPAP) की सहायता दी गई।
गंभीर एनीमिया को देखते हुए बच्चे को दो बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी किया गया। इसके साथ ही शॉक और ब्रेन मलेरिया का गहन उपचार किया गया।
चिकित्सकों और PICU टीम की लगातार निगरानी
बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए शिशु रोग विभाग की टीम ने लगातार उपचार और निगरानी की। अस्पताल के चिकित्सकीय विवरण में उपचार में डॉ. अनुरूप साहू, डॉ. डीआरओ मंडावी, डॉ. राहुल पराशर, डॉ. स्मिता वर्मा, डॉ. संजय राव, डॉ. श्रव्या, डॉ. तुषार, डॉ. शैली, डॉ. अभिलेष, डॉ. करण तथा PICU इंचार्ज सहित चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ के योगदान का उल्लेख किया गया है।

लगातार उपचार, वेंटिलेटर सपोर्ट, रक्त चढ़ाने और संक्रमण व मलेरिया के उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया। अस्पताल के चिकित्सकीय दस्तावेज के अनुसार बच्चे की हालत अब खतरे से बाहर बताई गई है और उसका उपचार अभी भी जारी है।
गंभीर हालत में समय पर अस्पताल पहुंचाना बना महत्वपूर्ण
यह मामला एक बार फिर बताता है कि सांप के काटने, सांस लेने में गंभीर परेशानी, बेहोशी या मलेरिया जैसी आपात स्थिति में मरीज को बिना समय गंवाए विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना कितना महत्वपूर्ण है। इस बच्चे की स्थिति में एक साथ कई गंभीर जटिलताएं सामने आई थीं, लेकिन समय पर रेफरल और PICU में मिले गहन उपचार से उसकी हालत में सुधार संभव हुआ।