आयुष्मान के रिकॉर्ड पर सवाल: मरीज 3 दिन भर्ती, पोर्टल पर 42 दिन! दस्तावेज मांगने पर भी नहीं मिला डिस्चार्ज पेपर

आयुष्मान के रिकॉर्ड पर सवाल: मरीज 3 दिन भर्ती, पोर्टल पर 42 दिन! दस्तावेज मांगने पर भी नहीं मिला डिस्चार्ज पेपर
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

20 अगस्त 2026 जगदलपुर :- आयुष्मान भारत योजना गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़ी राहत है, लेकिन जगदलपुर में सामने आया एक मामला इस योजना के रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मिली जानकारी के मुताबिक, जगदलपुर निवासी एक मरीज 3 जून 2026 को डिमरापाल स्थित लेट बलिराम कश्यप मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं लेट महेंद्र कर्मा मेमोरियल अस्पताल में भर्ती हुआ और 6 जून को डिस्चार्ज हो गया। यानी मरीज अस्पताल में करीब तीन दिन रहा।

लेकिन इसके बाद मरीज के मोबाइल पर आयुष्मान भारत योजना से संबंधित संदेश आया, जिसमें पंजीयन संख्या 2026061310051731 के तहत भर्ती की तारीख 13 जून 2026 दोपहर 12 बजे और डिस्चार्ज की तारीख 24 जुलाई 2026 दोपहर 1:20 बजे दर्ज बताई गई।

यानी योजना के रिकॉर्ड में मरीज की भर्ती अवधि करीब 42 दिन दिखाई दे रही है।

तीन दिन अस्पताल में, रिकॉर्ड में 42 दिन कैसे?

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है— जब मरीज के अनुसार वह 3 जून से 6 जून तक ही अस्पताल में भर्ती रहा, तो आयुष्मान के रिकॉर्ड में 13 जून से 24 जुलाई तक की लंबी अवधि कैसे दर्ज हुई?

क्या यह डाटा एंट्री की गलती है?

क्या रिकॉर्ड अपडेट करने में कोई तकनीकी त्रुटि हुई?

या फिर इस पूरे मामले की किसी स्तर पर जांच की आवश्यकता है?

इन सवालों का जवाब संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

42 दिन का खर्च कितना? मरीज को जानकारी क्यों नहीं?

मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि आयुष्मान रिकॉर्ड में 42 दिनों की भर्ती दर्ज है, तो इस अवधि के दौरान योजना के तहत कितने रुपये का क्लेम या भुगतान दर्ज हुआ, इसकी जानकारी मरीज को क्यों नहीं मिली?

मरीज का कहना है कि उसे इस संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

डिस्चार्ज पेपर भी नहीं मिला!

मामला तब और गंभीर हो जाता है जब मरीज के अनुसार अस्पताल से डिस्चार्ज से जुड़े दस्तावेज मांगे जाने के बावजूद उसे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

ऐसे में सवाल उठता है कि मरीज का वास्तविक डिस्चार्ज रिकॉर्ड क्या है?

अस्पताल के रिकॉर्ड में भर्ती और डिस्चार्ज की तारीख क्या दर्ज है?

और आयुष्मान पोर्टल पर दिखाई दे रही तारीखों का आधार क्या है?

अब जांच की जरूरत

यह मामला सही है या किसी तकनीकी अथवा रिकॉर्ड संबंधी त्रुटि का परिणाम—इसका स्पष्ट जवाब अस्पताल प्रबंधन और आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारियों के रिकॉर्ड की जांच से ही मिल सकता है।

साथ ही यह भी जांच का विषय है कि ऐसी विसंगति केवल इस मामले तक सीमित है या अन्य मरीजों के आयुष्मान रिकॉर्ड में भी ऐसी गलतियां सामने आ सकती हैं।

मरीज भी रहें सतर्क

आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने वाले मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज समरी, बिल, जांच रिपोर्ट और इलाज से संबंधित दस्तावेज जरूर प्राप्त करने चाहिए। साथ ही अपने आयुष्मान कार्ड पर दर्ज इलाज, भर्ती अवधि और योजना के तहत दर्ज क्लेम की जानकारी भी समय-समय पर जांचनी चाहिए।

आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजना में एक-एक रुपये और एक-एक मरीज का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आने पर उसकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होना जरूरी है।