जहां मदद की सबसे ज्यादा जरूरत, वहां पहुंचे रोजवीन दास और महेंद्र महापात्र; बाढ़ प्रभावित परिवारों को बांटी राहत सामग्री
29 सितम्बर 2026 जगदलपुर/बस्तर :- लगातार चार दिनों तक हुई भारी बारिश और जलाशयों से छोड़े गए पानी के बाद बस्तर जिले के कई गांवों में बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में कच्चे मकान ढह गए हैं, सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं और कई प्रभावित परिवार अब भी राहत और सरकारी सहायता का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे मुश्किल हालात में जहां अब तक प्रशासनिक मदद पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाई है, वहां सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटे हैं।

इसी क्रम में रोजवीन दास, अल्पसंख्यक विभाग अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी, अपने सहयोगियों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। उनके साथ वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी महेंद्र महापात्र भी मौजूद रहे। टीम ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और जरूरत की राहत सामग्री का वितरण किया।
कुरुषपाल और कोरपाल में बाढ़ ने मचाई तबाही
गुमड़ेल पंचायत के अंतर्गत आने वाले कुरुषपाल और कोरपाल गांव में बाढ़ का असर बेहद गंभीर बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ के पानी से गांव के करीब 200 घर प्रभावित हुए हैं, जबकि कई कच्चे मकान पूरी तरह ढह गए हैं। जिन परिवारों के घर गिर गए हैं, उनके सामने अब रहने और रात गुजारने तक का संकट खड़ा हो गया है।

कई प्रभावित परिवार सड़क किनारे या अस्थायी स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान वे राहत शिविरों में चले गए थे, लेकिन जब पानी कम होने के बाद वापस अपने घर पहुंचे तो तबाही का वास्तविक मंजर सामने आया। घरों में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर, बच्चों की किताबें और जरूरी सामान पानी में खराब हो गया।
बच्चों की किताबें और स्कूल सामग्री भी बर्बाद

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर गरीब और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों पर पड़ा है। बच्चों की किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग और अन्य शैक्षणिक सामग्री बाढ़ के पानी में खराब हो गई हैं। कई स्कूल परिसरों में भी पानी भरने के कारण पढ़ाई प्रभावित हुई है और ग्रामीणों के अनुसार करीब एक सप्ताह से स्कूलों में नियमित गतिविधियां बाधित हैं।
ग्रामीणों ने राहत दल के सामने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि बाढ़ के बाद उनके सामने दोबारा घर बसाने और बच्चों की पढ़ाई शुरू कराने की बड़ी चुनौती है।
मेडिकल टीम पहुंची, लेकिन जरूरत बड़ी

प्रभावित गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेडिकल टीम भी पहुंची है। ग्रामीणों के अनुसार फिलहाल दो नर्सों के माध्यम से प्राथमिक स्तर की दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि बाढ़ के बाद पैदा हुई परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधा, साफ पानी, भोजन और अन्य जरूरी सामग्री की आवश्यकता जताई है।
रोजवीन दास ने की स्वयंसेवी संगठनों से मदद की अपील
बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद रोजवीन दास ने कहा कि यह समय राजनीति से ऊपर उठकर मानव सेवा के लिए एकजुट होने का है। उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों से अपील की कि वे ऐसे गांवों तक पहुंचें, जहां अभी भी प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के घर पूरी तरह टूट गए हैं, उन्हें सिर्फ भोजन ही नहीं बल्कि कपड़े, बिस्तर, मच्छरदानी, बच्चों की पढ़ाई की सामग्री और अन्य जरूरी सामान की भी आवश्यकता है।
राहत सामग्री लेकर पहुंची टीम

रोजवीन दास और उनके सहयोगियों ने प्रभावित परिवारों के बीच ट्रिपल/तिरपाल, कपड़ा और मच्छरदानी सहित जरूरी राहत सामग्री वितरित की। राहत सामग्री मिलने पर ग्रामीणों ने टीम का आभार जताया और अपनी समस्याओं से भी अवगत कराया।
वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी महेंद्र महापात्र ने भी ग्रामीणों से बातचीत कर बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी ली। प्रभावित परिवारों की स्थिति को देखते हुए उन्होंने समाज के सक्षम लोगों और सामाजिक संगठनों से आगे आकर मदद करने की अपील की।
सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का असर, पुनर्वास की चुनौती
लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद बस्तर संभाग के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी। बड़ी संख्या में गांव प्रभावित हुए और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों तथा राहत शिविरों में जाना पड़ा। पानी उतरने के बाद अब प्रभावित इलाकों में मकानों की क्षति, घरेलू सामान के नुकसान और पुनर्वास की चुनौती सामने आ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि राहत शिविरों से घर लौटने के बाद उन्हें वास्तविक नुकसान का पता चला है। कई परिवारों के पास रहने के लिए सुरक्षित छत तक नहीं बची है। ऐसे में प्रभावित गांवों का सर्वे कराकर तत्काल राहत और क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की मांग उठ रही है।
ग्रामीणों की उम्मीद अब प्रशासनिक सर्वे, राहत और पुनर्वास पर टिकी है।