वर्दी का रौब दिखाकर शादी का झांसा, दुष्कर्म और दूसरी शादी; सब इंस्पेक्टर को 10 साल का सश्रम कारावास,FTC कोर्ट की सख्त टिप्पणी—लोक सेवक के पद पर रहते किया गंभीर और घृणित अपराध, कुल ₹15 हजार अर्थदंड भी
14 अगस्त 2026 जगदलपुर :- पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर रहते हुए एक युवती को शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म करने और पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अपर सेशन न्यायाधीश एफटीसी शैलेश अच्युत्य पटवर्धन की अदालत ने अभियुक्त विकेश चौहान को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(ढ) के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड, जबकि धारा 494 के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹5 हजार अर्थदंड से दंडित किया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में क्रमशः तीन माह और एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
फेसबुक से हुई पहचान, खुद को बताया था तलाकशुदा
अभियोजन के अनुसार, घटना के समय विकेश चौहान चित्रकूट चौकी में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ था। पीड़िता और आरोपी की पहचान फेसबुक के माध्यम से हुई थी। पीड़िता आरोपी की दूर की रिश्तेदार भी बताई गई है।
आरोप के मुताबिक बातचीत के दौरान विकेश ने स्वयं को तलाकशुदा बताया और युवती को शादी का भरोसा दिलाया। इसी विश्वास के आधार पर दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी। नवंबर 2018 में आरोपी पीड़िता के माता-पिता से मिला और विवाह का आश्वासन देकर उसे जगदलपुर ले आया।
पीड़िता आरोपी के साथ पुलिस क्वार्टर में रहने लगी। अभियोजन के अनुसार, 6 जनवरी 2019 को विवाह का भरोसा देकर आरोपी ने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में उसे चित्रकूट स्थित शिव मंदिर ले जाकर विवाह किया गया और दोनों के साथ रहने की बात सामने आई।
पहली पत्नी के जीवित होने का पता चला तो सामने आया पूरा मामला
कुछ समय बाद पीड़िता को जानकारी मिली कि आरोपी की पहली पत्नी जीवित है और दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ है। इस जानकारी के बाद पीड़िता ने आरोपी से इस संबंध में पूछताछ की, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इसके बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को पूरे मामले की जानकारी दी और न्यू राजेंद्र नगर थाना, रायपुर में शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच और न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान अभियोजन की ओर से विभिन्न साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोनों धाराओं में दोषी माना और सजा सुनाई।
कोर्ट ने पुलिसकर्मी के पद को देखते हुए अपराध को माना गंभीर
फैसले में न्यायालय ने आरोपी के कृत्य पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अभियुक्त लोक सेवक और पुलिसकर्मी के पद पर पदस्थ था। इसके बावजूद वह पहले से विवाहित होने के तथ्य को छिपाकर पीड़िता को विवाह का भरोसा देता रहा।
न्यायालय के अनुसार, आरोपी ने अपने विवाह विच्छेद होने का कथित रूप से मिथ्या कथन कर पीड़िता का विश्वास हासिल किया और विवाह का वचन पूरा करने के आशय के बिना उसे विभिन्न स्थानों पर ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। अदालत ने कथित दिखावटी विवाह के पहलू को भी गंभीरता से लिया। कोर्ट ने आरोपी के कृत्य को अनैतिक, असामाजिक और विधि-विरुद्ध बताते हुए महिला के शरीर और शील के विरुद्ध किया गया गंभीर एवं घृणित अपराध माना।
लोक सेवक की जिम्मेदारी पर भी अदालत ने जताई चिंता
न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी पुलिस विभाग में लोक सेवक के रूप में पदस्थ था। ऐसे पद पर रहते हुए कानून और नैतिक आचरण का पालन करना उसकी जिम्मेदारी थी। अदालत ने इसी कारण अपराध की प्रकृति को गंभीर मानते हुए कठोर दंड को उचित माना।
अदालत का यह फैसला पुलिस विभाग और अन्य लोक सेवकों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि पद और वर्दी कानून से ऊपर नहीं है तथा किसी पद का दुरुपयोग कर अपराध करने पर न्यायालय गंभीरता से कार्रवाई कर सकता है।
अग्रिम जमानत पर था आरोपी
मामले की कार्रवाई के दौरान आरोपी अग्रिम जमानत पर बताया गया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक प्रीति वानखेड़े ने पैरवी की।
अदालत के निर्णय के बाद अब आरोपी को निर्धारित सजा भुगतनी होगी। इस मामले में कोर्ट की टिप्पणी ने भी फैसले को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी “लोक सेवक होकर किया अपराध” न्यायालय ने अभियुक्त के कृत्य को अनैतिक, असामाजिक एवं विधि-विरुद्ध बताते हुए कहा कि पुलिसकर्मी जैसे लोक सेवक द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का है। अदालत के अनुसार, अभियुक्त ने स्वयं को तलाकशुदा बताकर पीड़िता को विवाह का भरोसा दिलाया और बाद में उसके साथ दिखावटी विवाह किया।
फैसले का सार:
- धारा 376(2)(ढ): 10 वर्ष सश्रम कारावास + ₹10 हजार अर्थदंड
- धारा 494: 5 वर्ष सश्रम कारावास + ₹5 हजार अर्थदंड
- दोनों सजाएं: साथ-साथ चलेंगी
- अर्थदंड न देने पर: अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान
- अभियुक्त: विकेश चौहान, तत्कालीन सब इंस्पेक्टर
- अभियोजन पैरवी: लोक अभियोजक प्रीति वानखेड़े