आधी रात मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचा किन्नर समाज, चुनरी-साड़ी अर्पित कर मांगी बस्तर की सुख-समृद्धि

आधी रात मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचा किन्नर समाज, चुनरी-साड़ी अर्पित कर मांगी बस्तर की सुख-समृद्धि
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

11 अक्टूबर 2026 जगदलपुर :-छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था का अनूठा स्वरूप देखने को मिलता है। किन्नर समाज के सदस्य विशेष श्रृंगार कर चुनरी, साड़ी और पूजन सामग्री लेकर माता के दरबार पहुंचते हैं। रात्रि में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मां दंतेश्वरी को वस्त्र और श्रृंगार सामग्री अर्पित कर पूरे बस्तर की सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की जाती है।

इस परंपरा की विशेषता यह है कि इसमें किन्नर समाज के सदस्य सामूहिक रूप से शामिल होकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। धार्मिक माहौल, पारंपरिक वेशभूषा, पूजा-अर्चना और माता के जयकारों के बीच यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक विविधता और लोकआस्था को दर्शाता है।

मना जाता है की रियासतकालीन आस्था से जुड़ी है परंपरा

बस्तर का इतिहास राजपरिवार, आराध्य देवी मां दंतेश्वरी और विशिष्ट धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित विवरणों में किन्नर समाज की इस रस्म को भी रियासतकालीन आस्था से जोड़कर देखा जाता है।

हालांकि, इस परंपरा की शुरुआत किस वर्ष हुई, तत्कालीन किस शासक के समय इसे आरंभ किया गया और यह कितने वर्षों तक लगातार निभाई जाती रही, इसकी पुष्टि करने वाले प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध होने की जानकारी नहीं है। कुछ समाचार विवरणों में यह भी उल्लेख मिलता है कि पुरानी परंपरा के बीच में बंद हो जाने के बाद इसे लगभग 15 वर्ष पहले दोबारा शुरू किया गया था। इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट करने के लिए मंदिर के पुजारियों, बस्तर राजपरिवार और स्थानीय इतिहासकारों से पुष्टि आवश्यक है।

चुनरी-साड़ी अर्पित कर मांगी जाती है खुशहाली

शारदीय नवरात्रि के दौरान किन्नर समाज के सदस्य विशेष रूप से सज-संवरकर माता के दरबार पहुंचते हैं। वे चुनरी, साड़ी और श्रृंगार सामग्री अर्पित कर मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना करते हैं।

समाज की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अनुष्ठान का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत मंगलकामना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के कल्याण की प्रार्थना करना भी है। माता से क्षेत्र में शांति, व्यापार में उन्नति, परिवारों में खुशहाली और समाज में सद्भाव बनाए रखने की कामना की जाती है।

व्यापारियों की उन्नति और परिवारों के मंगल की कामना

स्थानीय आस्था के अनुसार मां दंतेश्वरी बस्तर की आराध्य देवी हैं। उनके दरबार में की जाने वाली पूजा-अर्चना के माध्यम से श्रद्धालु अपने परिवार, व्यवसाय और पूरे क्षेत्र की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

किन्नर समाज की इस परंपरा में भी बस्तर के व्यापारियों के कारोबार में बरकत, परिवारों में सुख-शांति और लोगों के जीवन में खुशहाली की कामना जुड़ी हुई है। ये धार्मिक विश्वास और स्थानीय मान्यताएं हैं, जो पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक आस्था को अभिव्यक्त करती हैं।

किन्नर समाज की भागीदारी, बस्तर की सांस्कृतिक पहचान

मां दंतेश्वरी के दरबार में किन्नर समाज की सामूहिक उपस्थिति इस बात को दर्शाती है कि धार्मिक आस्था समाज के विभिन्न वर्गों को एक सूत्र में जोड़ती है। नवरात्रि जैसे प्रमुख पर्व पर इस प्रकार के आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक विविधता को सामने लाते हैं।

बस्तर की पहचान केवल विश्वप्रसिद्ध दशहरा पर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की अनेक स्थानीय धार्मिक रस्में, देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा और सामुदायिक सहभागिता भी इसकी विशिष्टता हैं। किन्नर समाज द्वारा चुनरी और श्रृंगार सामग्री अर्पित करने की यह परंपरा इसी लोकआस्था का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

इतिहास के दस्तावेजों से पुष्टि जरूरी

इस परंपरा को रियासतकालीन विरासत के रूप में समझने के लिए इसके आरंभ, ऐतिहासिक निरंतरता और पुनः शुरुआत से संबंधित तथ्यों की पुष्टि महत्वपूर्ण है। मंदिर के पुराने अभिलेख, राजपरिवार से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी और स्थानीय इतिहासकारों का शोध इस विषय में अधिक स्पष्टता प्रदान कर सकते हैं।

 जगदलपुर के मां दंतेश्वरी मंदिर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर किन्नर समाज द्वारा चुनरी, साड़ी और श्रृंगार सामग्री अर्पित करने की परंपरा बस्तर की धार्मिक आस्था और सामूहिक मंगलकामना का विशिष्ट स्वरूप है। इसे रियासतकालीन आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसकी सटीक ऐतिहासिक शुरुआत और निरंतरता की पुष्टि प्रमाणित स्रोतों से किया जाना आवश्यक है।