जगदलपुर में पुराने जमीन विवाद पर कोर्ट का अहम फैसला, प्रतिष्ठित व्यापारी परिवार के तीन सदस्यों और पटवारी समेत चार की सजा कायम,आरोपितों को दो-दो साल का सश्रम कारावास

जगदलपुर में पुराने जमीन विवाद पर कोर्ट का अहम फैसला, प्रतिष्ठित व्यापारी परिवार के तीन सदस्यों और पटवारी समेत चार की सजा कायम,आरोपितों को दो-दो साल का सश्रम कारावास
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

17 अक्टूबर 2026 जगदलपुर :- बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में करीब चार दशक पहले बेची गई जमीन को दोबारा बेचने से जुड़े मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, बस्तर सिद्धार्थ अग्रवाल की अदालत ने जगदलपुर के होटल कारोबारी मनोहर लुनिया सहित चार लोगों की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है। इनमें पटवारी नरेंद्र कुमार सोनी तथा मूलचंद्र लुनिया और बीरचंद्र लुनिया भी शामिल हैं।

16 अक्टूबर 2026 को पारित संयुक्त फैसले में अदालत ने आरोपितों की ओर से दायर दोनों दांडिक अपीलों को खारिज कर दिया। इससे विचारण न्यायालय द्वारा वर्ष 2018 में सुनाई गई दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और 100-100 रुपये अर्थदंड की सजा बरकरार रही। मामला एक ऐसे भूखंड से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1984 में पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से खरीदा गया था, लेकिन बाद में उसी जमीन पर दूसरे पक्ष की ओर से निर्माण कराए जाने के दौरान विवाद सामने आया।

1984 में पंजीकृत दस्तावेज से खरीदी गई थी 4,800 वर्गफीट जमीन

प्रकरण के अनुसार, वंदिता पटनायक के पिता बी. राधाकृष्णन ने 27 अगस्त 1984 को जगदलपुर देहात क्षेत्र के पटवारी हल्का नंबर 100 में स्थित खसरा नंबर 89/10 की 4,800 वर्गफीट जमीन लुनिया परिवार से पंजीकृत विक्रय पत्र के जरिए खरीदी थी।

जमीन की खरीद के बाद राजस्व प्रक्रिया के तहत नामांतरण और बटांकन किया गया। इसके बाद भूखंड का नया खसरा नंबर 89/41 निर्धारित हुआ और संबंधित राजस्व अभिलेखों में खरीदार का नाम दर्ज हो गया।

खरीद और राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होने के बाद परिवार जमीन को अपनी संपत्ति मानकर चल रहा था। लेकिन वर्षों बाद जब भूखंड पर मकान निर्माण कराने की कोशिश की गई, तब इस जमीन को लेकर विवाद सामने आया।

मकान बनवाने पहुंचे तो दूसरे पक्ष का निर्माण देखकर हुआ विवाद

मामले में दर्ज विवरण के मुताबिक, मई 2009 में वंदिता पटनायक अपने पति के साथ उक्त भूखंड पर मकान बनवाने पहुंचीं। वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि जमीन पर दूसरे लोगों की ओर से निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

इसके बाद भूखंड के स्वामित्व को लेकर विवाद बढ़ा और सीमांकन कराया गया। सीमांकन के दौरान जमीन की दोबारा बिक्री से संबंधित मामला सामने आया। इसके बाद इस संबंध में वर्ष 2010 में जगदलपुर के कोतवाली थाने में अपराध दर्ज कराया गया।

मामले की जांच और न्यायिक कार्यवाही के दौरान जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों तथा अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की गई। यही विवाद आगे चलकर आपराधिक प्रकरण और फिर अपील की कार्यवाही तक पहुंचा।

2018 में विचारण न्यायालय ने सुनाई थी सजा

इस मामले में विचारण न्यायालय ने 22 सितंबर 2018 को अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने पटवारी नरेंद्र कुमार सोनी, मनोहर लुनिया, मूलचंद्र लुनिया और बीरचंद्र लुनिया को धोखाधड़ी तथा आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित आरोपों में दोषी ठहराया था।

न्यायालय ने चारों को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 100-100 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। हालांकि, कूटरचना से संबंधित अन्य धाराओं में उन्हें दोषमुक्त किया गया था।

विचारण न्यायालय के फैसले के बाद आरोपितों की ओर से सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए दांडिक अपीलें दायर की गईं। अपीलों में निचली अदालत के निष्कर्षों पर पुनर्विचार करने की मांग की गई थी।

अपीलीय अदालत ने दस्तावेजों और गवाहियों के आधार पर फैसला रखा कायम

अपीलों की सुनवाई के दौरान प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। न्यायालय ने जमीन की दोबारा बिक्री से संबंधित तथ्यों और विचारण न्यायालय के निष्कर्षों पर विचार किया।

सुनवाई के दौरान दस्तावेजों का पर्याप्त सत्यापन नहीं किए जाने से संबंधित दलील को अदालत ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद न्यायालय ने दोनों दांडिक अपीलों को खारिज करते हुए चारों आरोपितों की दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी।

इस फैसले के साथ वर्ष 2018 में सुनाई गई सजा को अपीलीय स्तर पर भी कायम रखा गया है।

जमीन की खरीद-बिक्री में दस्तावेजों की जांच का मामला फिर चर्चा में

जगदलपुर का यह प्रकरण जमीन की खरीद-बिक्री में पंजीकृत दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और स्वामित्व की जांच के महत्व को सामने लाता है। लंबे समय पहले खरीदी गई जमीन पर वर्षों बाद विवाद खड़ा होने से संबंधित पक्षों को कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

मामले में अदालत का फैसला आने के बाद जमीन की दोबारा बिक्री से जुड़े विवाद में चारों आरोपितों की दोषसिद्धि और सजा बरकरार रही है। अब यह मामला जगदलपुर में पुराने भूखंडों के स्वामित्व और जमीन संबंधी दस्तावेजों की जांच के संदर्भ में भी चर्चा का विषय बन गया है।