"महाराष्ट्र की खदान, छत्तीसगढ़ की परेशानी: सुरजागढ़ माइनिंग पर उठे सवाल, धूल-धक्कड़ और गड्ढों से भरी सड़कों से त्रस्त ग्रामीण"
19 जुलाई 2026 बांदे/पखांजूर (उत्तर बस्तर कांकेर) :- महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में संचालित सुरजागढ़ लौह अयस्क खदान का प्रभाव अब छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है। कांकेर जिले के बांदे, पखांजूर और आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि खदान से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही का सबसे अधिक असर छत्तीसगढ़ की सड़कों और यहां के निवासियों पर पड़ रहा है, जबकि स्थानीय लोगों को अपेक्षित रोजगार और सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, सुरजागढ़ माइनिंग प्रोजेक्ट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहन छत्तीसगढ़ के मार्गों का उपयोग करते हुए आवागमन करते हैं। लगातार ओवरलोड ट्रकों के संचालन से क्षेत्र की सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। कई स्थानों पर सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई हैं, जिससे आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, मरीजों और आपातकालीन सेवाओं को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान शुरू होने के समय रोजगार और क्षेत्रीय विकास के अनेक वादे किए गए थे। सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वर्षों बाद भी बड़ी संख्या में स्थानीय युवक-युवतियां रोजगार से वंचित हैं। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि ट्रकों से उड़ने वाली धूल के कारण आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ गया है। घरों में धूल जमना आम बात हो गई है और कई लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की आशंका जताई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इस बीच, क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 'लॉयड्स मेटल्स' (Lloyds Metals) द्वारा संचालित सुरजागढ़ खदान के लिए महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र से भी मार्ग विकसित किया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि खदान तक पहुंचने के लिए छत्तीसगढ़ के मार्गों का उपयोग किस आधार पर किया जा रहा है? क्या इसके लिए संबंधित शासकीय विभागों से अनुमति प्राप्त की गई है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन द्वारा इस मार्ग के उपयोग की अनुमति दी गई है, तो राज्य सरकार और संबंधित कंपनी की यह जिम्मेदारी बनती है कि सड़क मरम्मत, धूल नियंत्रण, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा प्रभावित ग्रामवासियों की अन्य मूलभूत आवश्यकताओं पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाए।
इसी मुद्दे को लेकर परलकोट जन कल्याण संस्थान, पखांजूर द्वारा स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। संस्थान ने थाना प्रभारी को दिए गए ज्ञापन में बताया है कि क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर 20 जुलाई 2026, सोमवार को सुबह 10 बजे पखांजूर-कापसी में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

क्षेत्र के सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि सुरजागढ़ परियोजना से प्रभावित छत्तीसगढ़ के गांवों का स्वतंत्र सामाजिक एवं पर्यावरणीय आकलन कराया जाए। साथ ही सड़क मरम्मत, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के संबंध में स्पष्ट नीति बनाई जाए।
हालांकि, इस संबंध में कंपनी एवं संबंधित प्रशासन का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। कंपनी अथवा प्रशासन की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।