झीरम घाटी कांड में 13 साल बाद आया फैसला, NIA कोर्ट ने 10 नक्सलियों को माना दोषी

झीरम घाटी कांड में 13 साल बाद आया फैसला, NIA कोर्ट ने 10 नक्सलियों को माना दोषी
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

05 सितम्बर 2026 जगदलपुर :- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और दर्दनाक झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल लंबे इंतजार के बाद शनिवार, 5 सितंबर 2026 को फैसला सामने आया। जगदलपुर स्थित NIA कोर्ट ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। मामले में कुल 11 आरोपी नामजद थे, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान पहले ही मौत हो चुकी है।

झीरम घाटी कांड छत्तीसगढ़ के इतिहास में सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में गिना जाता है। 25 मई 2013 को दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर घात लगाकर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 31 लोगों की जान चली गई थी। हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

101 गवाहों के बयान और दस्तावेज बने सुनवाई का आधार

मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष बड़ी संख्या में साक्ष्य प्रस्तुत किए। अभियोजन की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए तथा मामले से जुड़े विभिन्न दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए।

मामले में अंतिम बहस 10 अगस्त 2026 को पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा था। आखिरकार 5 सितंबर को NIA कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी माना।

2013 में हुआ था दिल दहला देने वाला हमला

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा क्षेत्र से जगदलपुर की ओर बढ़ रही थी। इसी दौरान झीरम घाटी के जंगलों में भारी संख्या में हथियारबंद नक्सलियों ने काफिले को घेर लिया और हमला कर दिया।

हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्या चरण शुक्ल समेत कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सुरक्षा जवानों की मौत हुई थी। इस घटना में बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे।

विशेष रूप से महेंद्र कर्मा, जिन्हें बस्तर में सलवा जुडूम अभियान के प्रमुख चेहरों में माना जाता था, नक्सलियों के निशाने पर थे। हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था, नक्सल हिंसा और राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा को लेकर देशभर में गंभीर सवाल उठे थे।

13 साल तक चला कानूनी इंतजार

झीरम घाटी हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA को सौंपी गई थी। जांच के दौरान घटना से जुड़े कई पहलुओं और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की गई। मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है।

फैसले के बाद झीरम घाटी हमले में मारे गए लोगों के परिजनों और समर्थकों के बीच इस फैसले को लेकर प्रतिक्रिया सामने आने की उम्मीद है। हालांकि दोषियों को क्या सजा दी जाएगी, यह अदालत के आगे के आदेश में स्पष्ट होगा।