बाढ़ पीड़ितों को 10 हजार और किसानों को 65 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिलाने कांग्रेस ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन मांगें पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

बाढ़ पीड़ितों को 10 हजार और किसानों को 65 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिलाने कांग्रेस ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन मांगें पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

15 अक्टूबर 2026 जगदलपुर :-  बस्तर संभाग में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों और किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर एवं ग्रामीण ने मोर्चा खोल दिया है। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य और ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला के नेतृत्व में कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालकर महामहिम राज्यपाल के नाम बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

कांग्रेस ने राज्य सरकार से बाढ़ प्रभावित प्रत्येक पात्र परिवार को घोषित 10 हजार रुपये की सहायता राशि तत्काल देने तथा किसानों को फसल नुकसान के एवज में 65 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। साथ ही प्रभावित किसानों का किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण माफ करने और मकानों, मवेशियों तथा घरेलू सामान के नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई गई।

कांग्रेस ने सरकार को दो दिवस के भीतर मांगों पर उचित कार्रवाई करने का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि बाढ़ पीड़ितों को न्यायोचित राहत नहीं मिली, तो पार्टी किसानों और प्रभावित परिवारों के अधिकारों के लिए उग्र विरोध प्रदर्शन एवं आंदोलन करेगी।

बाढ़ ने उजाड़े घर, बर्बाद की फसलें; आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रभावित परिवार

शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि बस्तर संभाग, विशेषकर जगदलपुर और आसपास के क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बाढ़ के कारण अनेक परिवारों के मकान, घरेलू सामान और आजीविका के साधनों को नुकसान पहुंचा है। किसानों की फसलें बर्बाद होने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों को मवेशियों की मृत्यु और टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब होने से भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावित परिवारों को अपने घरों की मरम्मत, घरेलू सामान की दोबारा व्यवस्था और आजीविका को पटरी पर लाने के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत है। वहीं, किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए बीज, खाद, जुताई और मजदूरी पर खर्च करना होगा। ऐसे में पर्याप्त मुआवजे के अभाव में प्रभावित परिवारों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

10 हजार रुपये की सहायता अब तक नहीं मिलने की शिकायत

सुशील मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बाढ़ प्रभावित परिवारों को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई थी, लेकिन कांग्रेस के अनुसार, कई प्रभावित परिवारों को अब तक यह राशि नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि जिन पात्र परिवारों को सहायता राशि नहीं मिली है, उनका तत्काल सत्यापन कर समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि किसानों को 3,000 रुपये प्रति एकड़ अथवा 8,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दिए जाने की बात सामने आ रही है। वर्तमान समय में खेती की लागत और किसानों के नुकसान को देखते हुए इतनी कम राशि से भरपाई संभव नहीं है। बाढ़ ने किसानों की फसल के साथ उनकी खेती में लगी पूंजी को भी नुकसान पहुंचाया है। इसके बावजूद उन्हें बैंक ऋण चुकाने और अगली फसल की तैयारी की चिंता सता रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रभावितों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए तत्काल राहत उपलब्ध करानी चाहिए।

कांग्रेस की सात प्रमुख मांगें, मुआवजे की राशि बढ़ाने पर जोर

बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी ने ज्ञापन के माध्यम से बाढ़ प्रभावित परिवारों और किसानों के लिए कई प्रमुख मांगें रखीं। कांग्रेस ने कहा कि राहत वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और कोई भी वास्तविक प्रभावित परिवार सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए।

1. प्रत्येक पात्र परिवार को 10 हजार रुपये की सहायता: मुख्यमंत्री द्वारा घोषित आर्थिक सहायता राशि तत्काल वितरित की जाए। जिन परिवारों को अब तक राशि नहीं मिली है, उनका सत्यापन कर समयबद्ध भुगतान किया जाए।

2. किसानों को 65 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा: बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को 65 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित किसानों का किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण माफ किया जाए।

3. क्षतिग्रस्त मकानों के लिए बढ़ा हुआ मुआवजा: कांग्रेस ने पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकान के लिए 3 लाख रुपये, पक्के मकान के लिए 5 लाख रुपये तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1 लाख रुपये की सहायता देने की मांग की है।

4. मृत मवेशियों के लिए 60 हजार रुपये की सहायता: बाढ़ में मृत हुए प्रत्येक पात्र मवेशी के लिए 60 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि पशुधन के नुकसान से प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल मिल सके।

5. नुकसान का निष्पक्ष सर्वेक्षण: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों, मकानों, मवेशियों, घरेलू सामान और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। वास्तविक प्रभावित किसानों और परिवारों को सर्वेक्षण एवं राहत से वंचित न रखा जाए।

6. घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के नुकसान की भरपाई: बाढ़ के पानी से खराब हुए टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, कूलर, पंखे, कंप्यूटर और अन्य घरेलू सामान के नुकसान की भरपाई के लिए विशेष राहत प्रावधान बनाया जाए। कांग्रेस ने मांग की कि वर्तमान राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) के प्रावधानों में जिन वस्तुओं के नुकसान की भरपाई नहीं हो पा रही है, उन्हें भी राहत के दायरे में शामिल किया जाए।

7. राहत वितरण की समयसीमा तय हो: मुआवजा वितरण के लिए निश्चित समयसीमा निर्धारित की जाए। भुगतान में अनावश्यक देरी होने पर प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाए, ताकि प्रभावितों को समय पर सहायता मिल सके।

मकानों और मवेशियों के लिए मौजूदा सहायता अपर्याप्त: सुशील मौर्य

सुशील मौर्य ने कहा कि वर्तमान में मकान की पूर्ण क्षति पर 1 लाख 30 हजार रुपये, आंशिक क्षति पर 4,500 रुपये तथा बाढ़ में बहकर मृत हुए मवेशियों के लिए 2,500 रुपये की निर्धारित सहायता प्रभावित परिवारों के वास्तविक नुकसान की तुलना में अपर्याप्त है।

मौर्य ने कहा कि मकानों के पुनर्निर्माण, घरेलू सामान की खरीद और मवेशियों की क्षति से उबरने के लिए अधिक आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। सरकार को प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों और वास्तविक नुकसान का आकलन करते हुए राहत राशि में वृद्धि करनी चाहिए।

मौर्य ने कहा कि जब लोगों के घरों में रखा सामान बर्बाद हो गया हो, किसानों की फसलें नष्ट हो गई हों और परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई हो, तब केवल घोषणाओं से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रभावितों को तत्काल मुआवजा देकर उन्हें आर्थिक संकट से उबरने में मदद करे।

दो दिन में मांगें पूरी करें, वरना होगा उग्र आंदोलन

सुशील मौर्य ने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस की प्रमुख मांगों पर दो दिवस के भीतर उचित कार्रवाई की जाए और बाढ़ प्रभावित परिवारों तथा किसानों को न्यायोचित राहत उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समयावधि में मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो कांग्रेस पार्टी बाढ़ पीड़ितों और किसानों के अधिकारों के लिए उग्र विरोध प्रदर्शन एवं आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावितों को उनका हक दिलाने के लिए कांग्रेस लगातार आवाज उठाती रहेगी। प्रभावित परिवारों को राहत और मुआवजा देना किसी पर एहसान नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में उनकी मदद करने की जिम्मेदारी है।

प्रभावितों को बिना भेदभाव समय पर मिले सहायता: प्रेमशंकर शुक्ला

ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला ने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों और किसानों को राहत दिलाना कांग्रेस पार्टी की प्राथमिकता है। सरकार को प्रभावितों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए बिना किसी भेदभाव के सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर मुआवजा देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसानों की बर्बाद हुई फसलों, क्षतिग्रस्त मकानों, मृत मवेशियों और घरेलू संपत्ति के नुकसान का वास्तविक आकलन कर पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रभावित जनता की आवाज बनकर उनके हक और न्याय की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी।

कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी, किसान नेता लखेश्वर कश्यप, किसान कांग्रेस अध्यक्ष दयाराम कश्यप, जिला उपाध्यक्ष लेखन बघेल, वीरेंद्र परिहार, पुरण कश्यप, गणेश भारती, बुधरू कश्यप, ईश्वर पाणिग्राही, लक्ष्मण सेठिया, श्याम सुंदर साहनी, लक्की भारती, राम कश्यप, उमेश सेठिया, रामशंकर राव, ब्लॉक अध्यक्ष संतोष सेठिया, महामंत्री अल्ताफ उल्ला खान, प्रशांत जैन, जाहिद हुसैन, रविशंकर तिवारी, अनुराग महतो, नीतीश शर्मा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष लता निषाद, कोमल सेना, अल्पसंख्यक अध्यक्ष रोजविन दास, शुभम यदू, सहदेव नाग, सेमियल नाथ, विजेन्द्र ठाकुर, एस. नीला, मोहसिन खान और सलीम अली सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

अब प्रशासन और राज्य सरकार के अगले कदम पर नजरें टिकी हैं। कांग्रेस द्वारा दो दिवस की समयसीमा दिए जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों और किसानों की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है तथा उन्हें राहत और मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में कितनी तेजी लाई जाती है।