प्रतापगंज की शासकीय भूमि पर बढ़ा विवाद: विश्व आदिवासी दिवस से पहले आमने-सामने आए आदिवासी संगठन और प्रशासन विवादित भूमि पर कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने से सर्व आदिवासी समाज ने जताई नाराजगी, 

प्रतापगंज की शासकीय भूमि पर बढ़ा विवाद: विश्व आदिवासी दिवस से पहले आमने-सामने आए आदिवासी संगठन और प्रशासन विवादित भूमि पर कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने से सर्व आदिवासी समाज ने जताई नाराजगी, 
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

07 अगस्त 2026 जगदलपुर, छत्तीसगढ़ :- जगदलपुर के प्रतापगंज पारा स्थित शासकीय भूमि को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) से पहले फिर सुर्खियों में आ गया है। भूमि के एक हिस्से के आवंटन को लेकर सर्व आदिवासी समाज एवं विभिन्न मूलनिवासी संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है। वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण विवादित स्थल पर किसी भी प्रकार के आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती।

जानकारी के अनुसार प्रतापगंज पारा स्थित शीट नंबर-78, प्लॉट नंबर-165 की करीब 15,168 वर्गफीट शासकीय भूमि को लेकर लंबे समय से अलग-अलग पक्ष अपनी दावेदारी और आपत्तियां दर्ज कराते रहे हैं। सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग, बस्तर दशहरा तथा आदिवासी समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखी जानी चाहिए। समाज ने आरोप लगाया है कि भूमि के एक हिस्से का आवंटन दिगंबर जैन समाज के पक्ष में किए जाने की प्रक्रिया का लगातार विरोध किया जा रहा है।

आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्ष 2022 में इस भूमि को सार्वजनिक उपयोग और पार्किंग के लिए विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया था, जिस पर उन्होंने लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई थी। बाद में समाज ने मांग की कि भूमि आदिवासी समाज अथवा आदिम जाति सहकारी समिति को सामुदायिक उपयोग एवं युवाओं के रोजगार से जुड़े कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जाए।

इसी मुद्दे को लेकर पूर्व में नगर निगम कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन भी किया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका विरोध किसी समाज विशेष से नहीं, बल्कि शासकीय भूमि के जनहित में उपयोग को लेकर है।

बुधवार को कलेक्ट्रेट के आस्था सभाकक्ष में विश्व आदिवासी दिवस की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। सर्व आदिवासी समाज ने कार्यक्रम के समापन के लिए प्रतापगंज पारा स्थित स्थल पर पूजा-अर्चना एवं सभा आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन प्रशासन ने भूमि विवादित होने और मामला न्यायालय में लंबित होने का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद समाज के प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार कर नाराजगी जताई।

समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि उनकी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक आस्था का सम्मान नहीं किया गया। उनका कहना है कि प्रतापगंज पारा उनके लिए केवल शासकीय भूमि नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है।

सर्व आदिवासी समाज ने मांग की है कि भूमि आवंटन की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए, सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं तथा विवादित भूमि का उपयोग बस्तर दशहरा, धार्मिक अनुष्ठानों, सामुदायिक आयोजनों और जनसुविधाओं के लिए किया जाए। साथ ही समाज ने चेतावनी दी है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

विश्व आदिवासी दिवस से ठीक पहले सामने आए इस विवाद ने बस्तर की सामाजिक और राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन और राज्य शासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।