बस्तर में DEO की कुर्सी पर हलचल! 10 से अधिक दावेदारों ने रायपुर में लगाया जोर, लेकिन अस्थायी नियुक्ति ने बिगाड़ा सबका गणित!

बस्तर में DEO की कुर्सी पर हलचल! 10 से अधिक दावेदारों ने रायपुर में लगाया जोर, लेकिन अस्थायी नियुक्ति ने बिगाड़ा सबका गणित!
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

01 नवम्बर 2026 जगदलपुर :- बस्तर जिले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की कुर्सी इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। खबर है कि इस महत्वपूर्ण पद के लिए 10 से अधिक दावेदारों ने राजधानी रायपुर तक दौड़ लगाई। हर कोई अपनी योग्यता, अनुभव और पहुंच के दम पर इस पद पर काबिज होने की उम्मीद लगाए बैठा था।

आखिर DEO की कुर्सी में ऐसा क्या खास है कि इतने दावेदार राजधानी तक पहुंच रहे हैं? क्या यह केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी है या इसके साथ जुड़ी विभागीय ताकत और निर्णय लेने के अधिकार भी आकर्षण का केंद्र हैं? ये सवाल अब शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बन गए हैं।

अभय राम नोन्हारे को मिला अस्थायी प्रभार

इसी बीच लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा 1 नवंबर 2026 को जारी आदेश ने इस पूरी हलचल को नया मोड़ दे दिया है।

आदेश के अनुसार, निवर्तमान प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल 31 अक्टूबर 2026 को अधिवार्षिकी आयु पूर्ण कर शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो गए हैं। इसके बाद अभय राम नोन्हारे, प्राचार्य, शासकीय कन्या शिक्षा परिसर परचनपाल (बस्तर) को नवीन पदस्थापना होने तक आगामी आदेश तक जिला शिक्षा अधिकारी, बस्तर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

इस आदेश के साथ फिलहाल अस्थायी व्यवस्था कर दी गई है और स्थायी नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे कई दावेदारों की प्रतीक्षा बढ़ गई है।

योग्यता या पहुंच, किसे मिलेगी प्राथमिकता?

जिला शिक्षा अधिकारी का पद केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि जिले की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि स्थायी नियुक्ति में वरिष्ठता, प्रशासनिक अनुभव और कार्यक्षमता को प्राथमिकता मिलेगी या फिर राजधानी में बनाई गई पहुंच और संपर्क प्रभावी साबित होंगे?

बस्तर की शिक्षा व्यवस्था को ऐसे अधिकारी की जरूरत है, जो स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों की समस्याओं, शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीरता से काम कर सके।

स्थायी DEO की नियुक्ति पर टिकी निगाहें

फिलहाल अभय राम नोन्हारे को अतिरिक्त प्रभार मिलने से जिला शिक्षा अधिकारी की कुर्सी को लेकर जारी चर्चाओं पर कुछ विराम जरूर लगा है, लेकिन स्थायी नियुक्ति को लेकर उत्सुकता बरकरार है।

अब देखना होगा कि शासन बस्तर के लिए स्थायी जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में किस अधिकारी पर भरोसा जताता है।

सबसे बड़ा सवाल—बस्तर की DEO कुर्सी पर आखिर किसका होगा स्थायी कब्जा? योग्यता की जीत होगी या राजधानी में लगाई गई पहुंच काम आएगी?