बस्तर पंडुम में करोड़ों का खर्च सवालों के घेरे में: टेंट पर ₹6.14 करोड़, फ्लेक्स पर ₹81 लाख, एक ही फर्म को बार-बार ठेका क्यों? भारत किराया भंडार रायपुर को लगातार सरकारी काम मिलने पर उठे सवाल..?
1अगस्त 2026 जगदलपुर :-बस्तर पंडुम के आयोजन में टेंट, मंच, साज-सज्जा एवं अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं पर किए गए करोड़ों रुपये के खर्च को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयोजन में टेंट एवं अन्य व्यवस्थाओं पर लगभग ₹6,14,78,943 खर्च किए गए, जबकि फ्लेक्स और प्रचार सामग्री पर करीब ₹81 लाख व्यय होने की बात सामने आई है। इस खर्च को लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सरकारी विभागों के बड़े आयोजनों और करोड़ों रुपये के कार्यों का ठेका भारत किराया भंडार रायपुर को ही बार-बार क्यों दिया जा रहा है। आखिर ऐसी क्या विशेष योग्यता या प्रक्रिया है, जिसके कारण एक ही फर्म को लगातार बड़े सरकारी कार्य मिल रहे हैं? क्या सभी निविदा प्रक्रियाओं का पूरी तरह पारदर्शी ढंग से पालन किया गया? क्या अन्य पात्र फर्मों को समान अवसर मिला? इन प्रश्नों के उत्तर अब सार्वजनिक रूप से मांगे जा रहे हैं।
तत्कालीन कार्यपालन अभियंता रहे राजीव बतरा भी संदेह के घेरे में है उन पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर 2 ठेके और हर बार रायपुर के ही भारत किराया भंडार कंपनी को क्यों दिया गया...
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि टेंट जैसी अस्थायी व्यवस्था पर ही छह करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा सकते हैं, तो उसी राशि से लालबाग मैदान या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर एक स्थायी डोम अथवा बहुउद्देशीय सभागार का निर्माण कराया जा सकता था। इससे वर्षों तक सांस्कृतिक, सामाजिक और सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन कम लागत में संभव होता और जनता को स्थायी सुविधा मिलती रहे
इसी तरह केवल फ्लेक्स और प्रचार सामग्री पर ₹81 लाख खर्च किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े खर्च का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए तथा यह बताया जाना चाहिए कि किस मद में कितना भुगतान किया गया और उसका वास्तविक उपयोग क्या रहा।
जानकारों का मानना है कि यदि आयोजन से जुड़े सभी टेंडर दस्तावेज, तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय बोली, कार्यादेश और भुगतान संबंधी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाए, तो स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है। इससे किसी भी प्रकार की शंका या विवाद की गुंजाइश भी कम होगी।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया है और आरोप लगाया कि बार-बार एक ही टेंट वाले को क्यों टेंडर मिलता है यह पैसा बस्तर का है और बस्तर पडुम के नाम से सरकार लूट मचा के रखी है और इसकी जांच होनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों के ऊपर FIR होना चाहिए
विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी धन का उपयोग नियमों के अनुरूप हुआ है तो सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं, और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।