कांकेर में मादा भालू का कहर: सगे भाई-बहन की दर्दनाक मौत, एक बहन जिंदगी के लिए जूझ रही चार घंटे बाद वन विभाग ने किया रेस्क्यू

कांकेर में मादा भालू का कहर: सगे भाई-बहन की दर्दनाक मौत, एक बहन जिंदगी के लिए जूझ रही चार घंटे बाद वन विभाग ने किया रेस्क्यू
जगदलपुर - TIMES OF BASTAR

6 अगस्त 2026 कांकेर छत्तीसगढ़ :-  छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। नरहरपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत लारगांव मरकाटोला गांव में एक आक्रामक मादा भालू के हमले में सगे भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि एक अन्य बहन गंभीर रूप से घायल हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक और दहशत में डाल दिया है।        

वन विभाग की प्रारंभिक जांच के अनुसार, घटना से एक दिन पहले मादा भालू के शावक की लीवर संक्रमण के कारण मौत हो गई थी। माना जा रहा है कि इसी कारण मादा भालू अत्यधिक तनाव और आक्रोश में थी तथा उसने गांव के समीप पहुंचे ग्रामीणों पर हमला कर दिया।        

भाई को बचाने दौड़ी बहनों ने दिखाई बहादुरी        

जानकारी के अनुसार, गांव निवासी हलाल खोर जुर्री पर सबसे पहले मादा भालू ने हमला किया। भाई को बचाने के लिए उसकी दोनों बहनें चामरिन बाई (40 वर्ष) और खोरिन बाई (30 वर्ष) मौके पर पहुंचीं, लेकिन भालू ने उन पर भी हमला कर दिया। इस हमले में हलाल खोर जुर्री और चामरिन बाई की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि खोरिन बाई गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।        

कई घंटों तक शवों के पास डटी रही मादा भालू        

हमले के बाद मादा भालू कई घंटों तक मृतकों के शवों के पास ही बैठी रही, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई। सुरक्षा कारणों से कोई भी व्यक्ति शवों के पास नहीं जा सका। सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेर लिया।        

चार घंटे की मशक्कत के बाद किया गया ट्रैंकुलाइज        

रायपुर से बुलाई गई विशेषज्ञ वन्यजीव रेस्क्यू टीम ने करीब चार घंटे तक अभियान चलाया। काफी प्रयासों के बाद मादा भालू को ट्रैंकुलाइज कर बेहोश किया गया और सुरक्षित नियंत्रण में लिया गया। इसके बाद ही प्रशासन ने शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।        

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा        

मादा भालू के बेहोश होते ही आक्रोशित ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ उसकी ओर बढ़ने लगे। हालांकि पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया और किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोक दिया।        

पीड़ित परिवार को मिलेगा मुआवजा        

वन विभाग ने मृतकों के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। साथ ही शासन के नियमानुसार दोनों मृतकों के परिजनों को छह-छह लाख रुपये का मुआवजा शीघ्र प्रदान करने का आश्वासन दिया गया है। घायल महिला के उपचार की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा कराई जा रही है।        

मानव-वन्यजीव संघर्ष बना गंभीर चुनौती        

यह घटना एक बार फिर जंगलों से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बढ़ते हस्तक्षेप और तनावपूर्ण परिस्थितियों के कारण ऐसे हादसे बढ़ रहे हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों से जंगलों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने और किसी भी वन्यजीव की गतिविधि की सूचना तुरंत अधिकारियों को देने की अपील की है।